
रायपुर . महज चार साल की उम्र में जब वह तोतली भाषा में गाना गाने लगी तो मां-बाप ने गंभीरता से नहीं लिया। वक्त निकलते गया। जब पड़ोसियों ने बच्ची के पैरेंट्स से कहा कि आपकी बिटिया अच्छा गाती है। इसे प्रॉपर ट्रेनिंग दिलाइए तो कॅरियर संवर सकता है। न्होंने बेटी की प्रतिभा को समझते गायकी की दिशा में आगे बढ़ाया। भिलाई की पामेला जैन दो दशक से मुंबई में बतौर सिंगर स्थापित हो चुकी है। पामेला सिटी के निजी समारोह में शामिल हुईं। उनसे बातचीत के अंश:
अब तक की जर्नी के बारे में बताएं
सिंगिंग में मेरी रुचि बचपन से थी। मैंने पं. विमलेंदु मुखर्जी और कीर्ति व्यास से गायकी की शिक्षा ली। मेरी आवाज सुनो और आदाब अर्ज है जैसे प्रोग्राम्स में पार्टिसिपेट किया और वीनर भी रही। मैंने भिलाई स्टील प्लांट में जॉब भी किया। लेकिन मेरी मंजिल तो मुंबई जाकर सिंगर बनने की थी। वर्ष २००० में मैं मुंबई शिफ्ट हो गई।
अब तक की उपलब्ध्यिां क्या रहीं
मुंबई में मुझे पहला ब्रेक राजेश रोशन ने न तुम जानो न हम में दिया। इसमें दो गाने गाए। उनकी कुछ और फिल्मों में भी मैंने आवाज दी है। इसके अलावा एकसलमान खान स्टारर और एआर रहमान की संगीतबद्ध फिल्म 'दिल ने जिसे अपना कहा कलकत्ता मेल में अदनान सामी के साथ गीत गाए। हिट टीवी सीरियल कुमकुम के तीनों टाइटल सांग्स मेरे ही गाए हुए हैं। ये हे मोहब्बतें का टाइटल, इश्कबाज में ओ जाना..., ये रिश्ता क्या कहलाता है जैसे सीरियल में मुझे गाने का मौका मिला। गरबे को लेकर मैंने विदेशों में भी प्रस्तुति दी है।
यूथ को क्या मैसेज देंगी
सबसे पहले तो यूथ गायकी की अच्छी शिक्षा ले। उसके बाद लगातार रियाज करे। क्योंकि बिना तालीम और रियाज के गायकी में आगे बढऩा मुश्किल होता है। ज्यादा महत्वाकांक्षी न बनें। आप अपना बेस्ट दें। सक्सेस को लेकर स्ट्रेस न पालें। पॉजिटिव थॉट के साथ आगे बढ़ते रहें।

Published on:
14 Feb 2018 01:19 pm
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