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Cyclone Montha: चक्रवात मोंथा का असर, सर्दी में सस्ते बिकने वाले टमाटर के बढ़े भाव

Cyclone Montha: छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में टमाटर ने आंखें तरेर ली हैं, यानी चिल्हर में ज्यादातर राज्यों में टमाटर 40 रुपए किलो से ज्यादा कीमत पर बिक रहा है।

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Cyclone Montha: चक्रवात मोंथा का असर, सर्दी में सस्ते बिकने वाले टमाटर के बढ़े भाव

सर्दी में सस्ते बिकने वाले टमाटर के बढ़े भाव (Photo Patrika)

Cyclone Montha: @अजय रघुवंशी। ठंड के दिनों में टमाटर में महंगाई की लपटें हैं। अक्टूबर महीने के आखिरी हफ्ते में मोंथा चक्रवात और बारिश ने ऐसा कहर बरपाया, जिसका साइड इफेक्ट अब फसलों पर दिखाई पड़ रहा है। आमतौर पर इस सीजन में 5 से 10 रुपए किलो बिकने वाला टमाटर अब लाल सोना बन चुका है।

सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में टमाटर ने आंखें तरेर ली हैं, यानी चिल्हर में ज्यादातर राज्यों में टमाटर 40 रुपए किलो से ज्यादा कीमत पर बिक रहा है। रायपुर के ज्यादातर बाजारों में कीमतें प्रति किलो 40 से 50 और 60 रुपए है।

किसान संघ और किसानों के मुताबिक बीते पांच वर्षों में पहली बार टमाटर की फसल को इतना ज्यादा नुकसान हुआ। हालात यह है कि प्रति एकड़ किसानों को लागत तक वसूल नहीं हो पा रही है। यह हालात तब हैं, जब टमाटर की कीमतें उच्चतम स्तर पर हैं। किसानों ने बताया कि प्रति एकड़ 2 लाख से लेकर 2.30 लाख रुपए की लागत लगाने पर वर्तमान में 40 हजार रुपए ही वसूल हो पाए हैं।

कीमतें ज्यादा रहने के बाद भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई जिलों में किसानों ने फसल खराब होने के बाद खेतों की जुताई भी कर दी है। अक्टूबर महीने की बारिश की वजह से देश के अन्य राज्यों में भी टमाटर की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा। नई फसलों के बाद प्रदेश में 15 दिसंबर के बाद कीमतों में कुछ नरमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

38 से 40 रुपए प्रति किलो में टमाटर बेचने के बाद भी नुकसान हो रहा है। बारिश से बैक्टीरिया और वायरस की वजह से फसलें चौपट हो गई। लागत वसूल नहीं हो पा रही है। दीप पटेल, करेली, धमधा

प्रदेश में रोजाना लगभग 2000 टन टमाटर की डिमांड रहती है, लेकिन आवक 400 टन भी नहीं है। रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, अंबिकापुर, धमतरी सहित अन्य जिलों में महंगाई से लोग बेहाल है।

डिमांड 2000 टन, आवक मात्र 400 टन

अगस्त में फसल लगाई। अक्टूबर में पौधे तैयार होने के समय बारिश ने कहर बरपाया। इससे पौधों का विकास रुक गया। बीमारियां भी लग गई। उत्पादन 60 से 70त्न कम रहा। राधेश्याम पटेल, परसुली, धमधा