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डेंगू की महामारी से दो और युवकों ने तोड़ा दम, फिर भी भिलाई नहीं पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री

बीते 12 घंटों में डेंगू से यह तीसरी जान गई हैं
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रायपुर

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Deepak Sahu

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Updated: 29 Aug 2018, 9:13 AM IST

dengue outbreak

डेंगू की महामारी से दो और युवकों ने तोड़ा दम, फिर भी भिलाई नहीं पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री

भिलाई. डेंगू से वार्ड 12 सुपेला कांट्रेक्टर कॉलोनी निवासी सुरेश निर्मलकर (35) और पुरैना निवासी अब्दुल मेनन (32) की मंगलवार को रायपुर के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। शहर में डेंगू से मौत की संख्या अब 35 तक पहुंच गई है। तबियत बिगडऩे पर सुरेश को 26 अगस्त को और अब्दुल मेनन को 25 अगस्त को रायपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

कांट्रेक्टर कॉलोनी में रहने वाले सुरेश निर्मलकर मूल रूप से राजनांदगांव का रहने वाला था। वह भिलाई में अपने ससुराल में रहता था। बीते 12 घंटों में डेंगू से यह तीसरी जान गई हैं। इसके अलावा भिलाई में रहकर पढ़ाई कर रहे धमतरी के ८ छात्र भी डेंगू से पीडि़त हैं।

भिलाई में डेंगू से हुई पहली मौत के 30वें दिन भी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अजय चंद्राकर वहां नहीं पहुंचे। सिर्फ भिलाई में अब तक 35 की मौतें हो चुकी है। उम्मीद जताई जा रही है कि बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री भिलाई पहुंच सकते हैं।

डेंगू से मौत का सिलसिला और प्रभावितों के आंकड़े थम नहीं रहे हैं। दो दिन बाद डेंगू से फिर दो मौतों ने इसके उपचार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डेंगू के बेहतर उपचार के लिए चिकित्सक नेशनल गाइडलाइन की प्रक्रिया भी बदल चुके, बावजूद पीडि़तों को स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल रहा है। चिकित्सकों की मानें तो गाइडलाइन का पालन करने में रिस्क ज्यादा है। इसलिए प्लेटलेट्स चढ़ाकर जान बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

राजधानी में भी डेंगू को लेकर शासन ने महामारी घोषित किया है। फिर भी स्थानीय प्रशासन द्वारा डेंगू से बचाव के लिए सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। जोन स्तर पर एंटी लार्वा दवा का छिडक़ाव और फॉङ्क्षगग करने के लिए सिर्फ दो कर्मचारी मैदान में उतारे गए है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए निगम प्रशासन को एंटी लार्वा दवा का छिडक़ाव और फॉङ्क्षगग के लिए सभी 70 वार्डों में चार से छह कर्मचारी उतारना चाहिए। वैसे भी इन दिनों वार्डों में मच्छरों का प्रकोप इस कदर बढ़ गया है कि रातों की नींद और दिन का चैन छिन गया है। बगैर पंखे और एसी के घरों और ऑफिसों में रहना मुश्किल हो गया है।