
इस मिठाई का कोई जवाब नहीं था।
ताबीर हुसैन/ रायपुर. 15 अगस्त और 26 जनवरी दो ऐसे पर्व हैं जो देश की आजादी और गणतंत्र के अलावा खास मिठाई के लिए भी जाने जाते हैं। मुट्ठीभरर बूंदी। अब आपने इसे लड्डू के तौर पर खाया होगा या पैकेट में प्राप्त किया होगा। भई मकसद तो एक ही है- मूंह मीठा करना। खुशी के मौके पर मूंह मीठा करना न सिर्फ शगुन माना जाता है बल्कि सेलिब्रेट भी किया जाता है। एक दौर था जब विद्यार्थी तिरंगा फहराने के बाद बूंदी के लिए लंबी कतार लगाया करते थे। लाइन में लगना भी हमें गौरवान्वित करता था। ज्यादातर बच्चे बूंदी घर लाया करते थे। प्रसाद की तर्ज पर बांटकर खाया जाता था। वक्त बदलने के साथ कई बदलाव आए लेकिन बूंदी का महत्तव आज भी बरकरार है। हालांकि कुछ निजी स्कूलों ने इस परिपाटी को बदल दिया है। वे अब मिठाई के नाम पर चॉकलेट देने लगे हैं। आज हमने कुछ स्टूडेंट्स व पैरेंट्स से बात की और बूंदी को लेकर उनके विचार जाने। चयनित विचारों को प्रकाशित किया जा रहा है।
आज भी मन मचल उठता है
जब स्कूल में थे तब हमारे लिए 15 अगस्त किसी त्यौहार से कम नहीं था। स्कूल में लम्बी लाइन लगने के बाद मिलने वाली मुट्ठीभरर बूंदी में जो स्वाद और मज़ा था वो किसी भी मिठाई में नहीं। सालों बीत गए स्कूल छोड़े लेकिन आज भी मन मचल उठता है स्कूल की उस बूंदी के लिए।
डॉ. प्रीती सतपथी, असिस्टेंट प्रोफेसर
अफसोस होता है
15 अगस्त के सारे कार्यक्रमों की बड़ी याद आती है। कोरोना की वजह से पिछले 2 सालों से इन आयोजन का हिस्सा नहीं बन पाने का बहुत अफ़सोस होता है। स्कूल में 15 अगस्त को मिलने वाले चॉकलेट और बूंदी और अपने दोस्तों की कमी बहुत महसूस होती है।
साक्षी सतपथी, दसवीं की छात्रा
सुखद अहसास था
कोविड के चलते स्कूल नहीं जा रहे। ध्वजारोहण और उसके बाद बूंदी खाना बहुत ही अच्छा अहसास हुआ करता था। मैं उन दिनों को बहुत मिस कर रही हूँ।
अवनी श्रीवास्तव, कक्षा आठवीं
कोरोना की वजह से मिठास भी फीकी पड़ गई
आज के दिन मेरा सबसे पसंदीदा कार्यक्रम ध्वजारोहण का रहता था। गर्व देने वाले उस पल के बाद हम सभी को बूंदी मिलती थी। साथ ही चॉकलेट भी। अब कोरोना के वजह से वो भी सब बंद सा है। बहुत याद आती है बूंदी के लड्डुओं की। अब उनकी मिठास भी कोरोना की वजह से फीकी पड़ गई है। पता नहीं कब सब ठीक होगा और हम पहले की तरह एन्जॉय कर सकेंगे।
शिवाक्षी नायक, कक्षा छठवीं
Published on:
15 Aug 2021 12:01 pm
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