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Instagram Reels : ज्यादा रील्स देखने वालों को हो रही मेन्टल प्रोब्लेम्स, नेगेटिव विचार आने से बढ़ रहा गुस्सा और चिड़चिड़ापन

Instagram Reels : इन दिनों रील्स का ट्रेंड चल पड़ा है। यूथ का ज्यादा समय रील्स देखने में ही निकल रहा है। साइकोलॉजिस्ट की मानें तो यह एक तरह का एडिक्शन है।

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Instagram Reels : ज्यादा रील्स देखने वालों हो रही मेन्टल प्रोब्लेम्स, नेगेटिव विचार आने से बढ़ रहा  गुस्सा और चिड़चिड़ापन

Instagram Reels : ज्यादा रील्स देखने वालों हो रही मेन्टल प्रोब्लेम्स, नेगेटिव विचार आने से बढ़ रहा गुस्सा और चिड़चिड़ापन

रायपुर . इन दिनों रील्स का ट्रेंड चल पड़ा है। यूथ का ज्यादा समय रील्स देखने में ही निकल रहा है। साइकोलॉजिस्ट की मानें तो यह एक तरह का एडिक्शन है। हाल ही में एनआईटी रायपुर की ओवरऑल टॉपर ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनकी लाइफ का सबसे डिजास्टर एक्सपीरियंस रील देखना रहा है।

इसलिए वे पढ़ाई के वक्त इंस्टाग्राम डिलीट कर दिया करती थीं। कुछ इंटरनेशनल स्टडी और रिसर्च पेपर में बताया गया है कि रील्स के बहुत अधिक देखने या बनाने से निगेटिव मेंटलिटी डेवलप हो रही है।

स्टडी के मुताबिक भारत में सबसे अधिक लोग इंस्टाग्राम देखने वाले हैं। शॉर्ट वीडियोज को ही रील्स बोलते हैं। यह तब ट्रेंड में आया जब देश में टिकटॉक बंद हुआ। इसके बंद होते ही युवा इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करने लगे।

रील्स में कई तरह के वीडियो पोस्ट किए जाते हैं। ज्यादातर एंटरटेनमेंट वाले होते हैं। वैसे इन दिनों स्मार्ट अंग्रेजी सीखो और मोटिवेशनल रील्स भी काफी शेयर किए जा रहे हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक रील्स देखने के चलते लोग समय का दुरुपयोग कर रहे हैं। इसके फेर में घंटों वक्त निकल जाता है और लोगों को पता ही नहीं चलता। इससे उनके काम पर असर पड़ रहा है। लोगों में डिप्रेशन की समस्या देखने के लिए मिल रही है।

लोग कई बार रील्स देखकर खुद में कमजोरियां तलाशने लगते हैं। दूसरों से कंपेयर करने लगते हैं। उसके जैसा बनने की कोशिश करने लगते हैं। जब खुद का बनाई रील्स वायरल नहीं होती या व्यूज नहीं मिलते तो उन्हें गुस्सा और चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है। यह धीरे-धीरे डिप्रेशन में बदल जाता है।

खुशी बाहर नहीं, भीतर मिलेगी

आमतौर पर खुद की इंपॉर्टेंट जानने के लिए युवा रील्स बनाते हैं। घर-परिवार में खुशी नहीं मिलती इसलिए वे वर्चुअल तौर पर हैप्पीनेस तलाशते हैं। वैसे भी यह एक तरह का एडिक्शन है। ऐसे लोग रील्स के फॉलोअर्स को ही अपना दोस्त मानने लगते हैं।

वर्चुअल दोस्त को ही असली मानने लगते हैं। उनके कमेंट्स को ही दिल से ले लेते हैं। इस कारण कभी-कभी डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। वर्चुअल लाइफ आपको फिजिकल और मेंटल दोनों रूप से कमजोर कर रही है। खुशी बाहर नहीं, भीतर तलाशनी होगी

एक रिपोर्ट के मुताबिक रील्स देखने के चलते लोग समय का दुरुपयोग कर रहे हैं। इसके फेर में घंटों वक्त निकल जाता है और लोगों को पता ही नहीं चलता। इससे उनके काम पर असर पड़ रहा है। लोगों में डिप्रेशन की समस्या देखने के लिए मिल रही है।

लोग कई बार रील्स देखकर खुद में कमजोरियां तलाशने लगते हैं। दूसरों से कंपेयर करने लगते हैं। उसके जैसा बनने की कोशिश करने लगते हैं। जब खुद का बनाई रील्स वायरल नहीं होती या व्यूज नहीं मिलते तो उन्हें गुस्सा और चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है। यह धीरे-धीरे डिप्रेशन में बदल जाता है।

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