
रायपुर. आईपीएस राहुल शर्मा (IPS Rahul Sharma Suicide case) के मौत के 8 साल के बाद एक बार फिर पूरे मामले की फाइल खुलेगी। राज्य सरकार के निर्देश पर गृहविभाग के उपसचिव मुकुंद गजभिये ने इसका आदेश जारी किया है। इसमें पांच सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। डीजी जेल संजय पिल्लै के अगुवाई में पांच सदस्यीय सीनियर अफसरों की टीम बनाई है। यह टीम मार्च 2012 में हुई राहुल शर्मा की मौत के मामले की जांच करेगी।
बता दें कि आईपीएस राहुल शर्मा ने 12 मार्च 2012 को बिलासपुर एसपी रहते हुए पुलिस ऑफिसर मेस में गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इसकी सीबीआई जांच की अनुशंसा की लेकिन जांच के दौरान कोई भी तथ्य सामने नहीं आने के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।
ये पांच सदस्य हैं टीम में
इस टीम में बिलासपुर के आईजी दीपांशु काबरा, सरगुजा के आईजी रतनलाल डांगी, बिलासपुर के एसपी प्रशांत अग्रवाल, जोनल पुलिस अधीक्षक विशेष शाखा अर्चना झा कमेटी में सदस्य होंगी। इस कमेटी की अगुवाई डीजी जेल संजय पिल्लै करेंगे।
परिजनों ने गुहार लगाई थी
आईपीएस राहुल शर्मा की मौत के बाद 14 मार्च 2012 को विधानसभा में सीबीआई जांच की घोषणा हुई थी। लेकिन, कोई साक्ष्य नहीं मिल पाने के बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। लेकिन राज्य में कांग्रेस सरकार के गठन के बाद परिवार वालों से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात कर गुहार लगाई थी। साथ ही इस मामले नए सिरे से जांच कराने का अनुरोध किया था।
बता दें कि पूववर्ती भाजपा सरकार द्वारा राहुल शर्मा की मौत को आत्महत्या बताए जाने पर वर्तमान कृषि मंत्री व उस दौरान नेता प्रतिपक्ष रविन्द्र चौबे ने इस पूरे प्रकरण में रमन सरकार को कठघरे में खड़ा किया था। विधानसभा में रविन्द्र चौबे के प्रश्न का जवाब देते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉॅ रमन सिंह ने कहा था कि, आईपीएस अधिकारी राहुल शर्मा की मौत की वजह आत्महत्या लग रही है। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के कारणों और संदर्भों का पता लगाने के लिए समुचित जांच जरूरी है। उन्होंने आगे कहा कि, इसी के मददेनजर हमने राहुल शर्मा की मौत की परिस्थितियों और इसकी वजह की जांच सीबीआई से कराने का फैसला किया है।
Published on:
14 Nov 2020 11:26 am
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