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Farmer News:खाद की कमी दूर करने वर्मी कम्पोस्ट लेना किया अनिवार्य तो किसानों ने मांगी सब्सिडी

- वर्मी कम्पोस्ट के बिना किसानों को दूसरी खाद नहीं मिलने से विपक्ष ने भी खोला मोर्चा- सहकारी समिति से एक एकड़ के पीछे एक क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट लेना जरूरी

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Patrika Opinion : टकराव नहीं, आपसी बातचीत से निकले हल

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रायपुर. रासायनिक खाद की कमी और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने किसानों के लिए वर्मी कम्पोस्ट (vermi compost) लेना अनिवार्य कर दिया है। अनिवार्यता के चलते छोटे किसानों में नाराजगी है। उन्होंने वर्मी कम्पोस्ट के बिना दूसरी रासायनिक खाद नहीं मिल रही है। विपक्ष भी इसे मुद्दा बनाने में लगा हुआ है। इन सब के बीच किसान संगठनों ने सरकार से मांग की है कि वर्मी कम्पोस्ट के लिए साब्सिडी दी जाए।
'पत्रिकाÓ टीम ने सोमवार को राजधानी से लगे कुछ प्राथमिक कृषि सहकारी समिति का निरीक्षण किया। दंतरेंगा समिति में खाद लेने पहुंचे किसान सरकारी फरमान से ज्यादा खुश नजर नहीं आए।

किसान बोले, पुरानी व्यवस्था लागू होती तो ज्यादा अच्छा
खाद लेने पहुंचे श्याम बाई का कहना है कि वर्मी कम्पोस्ट के बिना दूसरी रासायनिक खाद नहीं मिलती है। इसलिए इसे भी लेना पड़ता है। पिछले साल भी इसका उपयोग किया था। फसल ठीक थी, लेकिन पुरानी व्यवस्था लागू होती तो ज्यादा अच्छा होता। किसान सेवाराम के एक एकड़ खेत है। उन्हें भी अन्य रासायनिक खाद के साथ वर्मी कम्पोस्ट दी गई है।

खाद लेने ही नहीं आ रहे किसान
सहकारी समिति खिलोरा की स्थिति अलग है। यहां किसान अभी खाद लेने ही नहीं आ रहे हैं। समिति प्रबंधक मदन लाल पटेल का कहना है, समिति में सुपर फास्फेट और पोटाश नहीं है। किसान बार-बार खाद लेने नहीं आ सकते हैं, इसलिए अभी नहीं आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि खाद का जल्द आवंटन होने की उम्मीद है।
फिर लौटे खेती किसानी में
सहकारी समिति में एक एेसा युवा किसान भी मिला, जो खेती में होने वाले लाभ को देखते हुए खुद इस काम को करने की शुरुआत की है। गजेन्द्र साहू ने बताया कि उनके पास तीन एकड़ खेत है। उनके पास दुकान भी है। इसलिए पहले खेत अधिया में देते थे। इस बार खुद खेती-किसानी कर रहे।
सीएम के नाम पत्र सौंपकर जताई आपत्ति
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील किसान संगठन के संयोजक राजकुमार गुप्त ने बताया कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री के नाम डिप्टी कलेक्टर को पत्र सौंपा गया था। इसमें किसानों की सहमति के बिना जैविक खाद खरीदने के लिए बाध्य करने पर कड़ी आपत्ति जताई गई। पत्र में जैविक खाद के दाम में सरकार द्वारा 50 फीसदी सब्सिडी देने की मांग भी की गई है ताकि किसान जैविक खाद का उपयोग करने के लिए प्रेरित हो।
इधर, सोसाइटियों को कड़ा पत्र जारी
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक ने सभी सोसाइटियों को कड़ा पत्र जारी कर एक एकड़ में एक क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट देने की हिदायत दी है। साथ ही यह भी कहा है कि इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही क्षम्य नहीं होगी।
उत्पादन ज्यादा, उपयोग कम इसलिए किया जरूरी
प्रदेश में गोबर खरीदी शुरू होने के बाद वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन अधिक और खपत कम हो गई है। प्रदेश की महिला समूहों की ओर से करीब 13 लाख 94 हजार क्विंटल कम्पोस्ट, 4 लाख 97 हजार क्विंटल से अधिक सुपर कम्पोस्ट और 18 हजार 925 क्विंटल सुपर कम्पोस्ट प्लस खाद का निर्माण किया जा चुका। इसके मुकाबले में खपत काफी कम है। इस वजह से सोसाइटियों के माध्यम से इसे किसानों को दिया जा रहा है।

वर्जन
सरकार जैविक खेती को बढ़ा देने की दिशा में काम कर रही है। वहीं केंद्र सरकार ने रासायनिक खाद के कोटे में 40 फीसदी की कटौती कर दी है। यदि विरोध करना है, तो भाजपा को केंद्र सरकार का विरोध करना चाहिए।
पंकज शर्मा, अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक रायपुर
बाक्स
एेसे समझे रासायनिक उर्वरकों की मांग-आपूर्ति का गणित
खाद- मांग-आपूर्ति
(आंकड़े मीट्रिक टन में)
यूरिया- 6.50 लाख -2.40 लाख
डीएपी-3 लाख -16,385
पोटाश- 80 हजार -10,205
एनपीके- 1.10 लाख - 17,035
सुपर फॉस्फेट (राखड)- 2.30 लाख -1.09लाख
कुल मांग- 13.70 लाख -3.92 लाख