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जगदलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज का हुआ नामकरण, अब ‘झाड़ा सिरहा‘ के नाम से जाना जाएगा

अब ‘झाड़ा सिरहा‘ के नाम से जाना जाएगा जगदलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज, राज्य सरकार ने जारी किया आदेश

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रायपुर. शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय जगदलपुर अब ‘‘झाड़ा सिरहा के नाम से जाना जाएगा। राज्य सरकार द्वारा इस महाविद्यालय का नामकरण ‘झाड़ा सिरहा शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय जगदलपुर‘ किया गया है।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने बस्तर प्रवास के दौरान जनप्रतिनिधियों की मांग पर शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय का नामकरण झाड़ा सिरहा के नाम पर करने की घोषणा की थी। जिसके परिपालन में इस आशय का आदेश कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर द्वारा जारी किया गया है।

कौन थे झाड़ा सिरहा
शहीद वीर झाड़ा सिरहा बस्तर के जल जंगल जमीन और आदिवासियों पर लूट पाट के साथ शोषण के खिलाफ 1876 को विद्रोह के आगाज किया
आदिवासी जननायक वीर शहीद झाड़ा सिरहा जननायक झाड़ा - सिरहा आगरवारा परगना के बड़े आरापुर के मांझी एवं माटी पुजारी के परिवार में पूस महीना (जनवरी) में जन्म हुआ। कई गांव से मिलकर एक परगना होता है, जिसका मुखिया मांझी होता है। आदिवासी समुदाय में आदिम संस्कृति में गांव की जिम्मेदारी माटी आया अपने से चुनकर गांव के किसी ना किसी के ऊपर सवार होती है, जिसे सिरहा कहा जाता है। झाड़ा सिरहा के ऊपर युवा अवस्था से ही गांव की देवी सवार होने लगी, तब से झाड़ा को सिरहा के नाम से जाना जाने लगे।
कालांतर में उसकी प्रसिद्धि की आस-पास परगनों के साथ कई गांवों तक होने लगीं थी । झाड़ा सिरहा झाड़-फूंक के जड़ी बूटीयो का पारंपरिक ज्ञान रखते थे, वे वन औषधि से लोगों का अचूक इलाज भी करते थे। आदिम संस्कृति में वर्तमान परिवेश में एक प्रसिद्ध व्यक्ति झाड़ा सिरहा हुआ करते हैं। उनकी पिता आगरा के मांझी होने के कारण परगना में आपसी विवाद का निपटारा उचित न्याय एवं उचित सलाहकार परगनों में दिया करते थे। तब झाड़ा सिरहा अपने पिता के निर्णय उचित सलाह को झाड़ा सिरहा को परगनों में उचित निर्णय लेने की क्षमता को देखकर परगनों के लोगों में काफी प्रभावित होने लगे।
दूसरी ओर जड़ी बूटी इलाज के कारण आगरा परगना में भी उनकी ख्याति थी। उनके पिता आगरवारा परगना मांझी एवं बड़े आरापुर गाँव के पुजारी थे। उसकी मृत्यु के पश्चात परंपरा के अनुसार पिता का निर्वहन करते हुए गांव वाले एवं परगनाओ के मांझी, मुखिया, सिरहा एवं सियान सज्जन की उपस्थिति में झाड़ा सिरहा को पारंपरिक रीति रिवाज के साथ लाल पगड़ी पहनाकर माटी पुजारी एवं परगना के मांझी के पद सौंपा गया। झाड़ा सिरहा बस्तर रियासत के सभी परगनों में लोग जानते थे।