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कभी आइने में चेहरा जो बदल सको तो आना, मुझे फिर से तुम परखना, मुझे फिर से आजमाना

पंडरी स्थित हाट परिसर में युवा आयोग ने रंगोअदब का आयोजन किया। दिलकश अंदाज में सामायिनों तक अपनी बात पहुंचाने में शायर कामयाब हुए।

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raipur mushayra

रायपुर . शेरो-शायरी और गजल में रुचि रखने वालों के लिए शनिवार की रात यादगार रही। पंडरी स्थित हाट परिसर में युवा आयोग ने रंगोअदब का आयोजन किया। दिलकश अंदाज में सामायिनों तक अपनी बात पहुंचाने में शायर कामयाब हुए। मुंबई के अजय अटापटु, बेमेतरा की नेहा दुबे समेत अन्य फनकारों ने प्रस्तुति दी।
तयशुदा जिंदगी है जीने की आज क्यों मानें
भोपाल की नामचीन शायरा डॉ नुसरत मेहदी ने मोहब्बत की मिश्री श्रोताओं कानों में घोलते हुए कहा-
इश्क में मजनुओं फरहाद नहीं होने के, ये नए लोग हैं, बर्बाद नहीं होने के।
ये जो दौर है, ये मोहब्बतें अभी है जाना, और दो-चार बार-बार नहीं होने के।।
हमने सोचा है, जमाने का कहा क्यों माने, तयशुदा जिंदगी है जीने की आज क्यों मानें।
आशीष तन्हा ने अर्ज किया, किससे-किससे मोहब्बत करूं, और किसे-किसे जुदा करूं, इतनी इबादत करके अब और किसे खुदा करूं।

हर दौर में बात रखी गई है
अभिव्यक्ति की आजादी पर उठ रहे सवाल पर आलोक श्रीवास्तव ने कहा, हर दौर में हमारे वरिष्ठों ने अपने तरीके से अपनी बात रखी है। दुष्यंत कुमार कहते हैं 'कहां तो तय था चरागां हर एक घर के लिए कहां चराग मयस्सर नहीं शहर के लिए। इसी तरह निदा फाजली कहते हैं 'हर एक घर में दिया भी जले अनाज भी हो, अगर न हो कहीं ऐसा तो एहतिजाज भी हो। तो कहने का मतलब ये है कि रचनाकार सिर्फ अपनी रचना के माध्यम से ही बात कहता आया है हम भी कहते रहे हैं। देश में किसी तरह की अभिव्यक्ति पर दबाव नहीं है।

जैसे आती है वैसे ही चली जाती है प्रसिद्ध
सोशल मीडिया के माध्यम से मिलने वाली पॉपुलरटी के सवाल पर शायरा डॉ नुसरत मेहदी ने कहा, ये सही है सोशल मीडिया एेसा प्लेटफार्म बन गया है जिससे रातोरात प्रसिद्धि मिल जाती है, लेकिन वह उसी तरह चली भी जाती है। इसलिए मैं तो यही सजेश करूंगी कि खुद को मांजने के लिए स्टडी बहुत जरूरी है। देर तक टिके रहने और स्थिर रहने के लिए किताबों से दूर न भागें। अच्छे लेखन के लिए लगातार अध्ययन जरूरी है।