
साल में एक बार दशहरा के दिन खुलते हैं 500 साल पुराने कंकाली मठ के पट, यह है मान्यता
रायपुर. Dussehra 2021: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के ब्राम्हण पारा स्थित कंकाली मठ (Kankali Math) का पट साल में 500 सालों से साल में एक बार दशहरा के दिन भक्तों के लिए खोला जाता है। मठ के महंत हरभूषण दास गिरि ने बताया इस बार भक्त गर्भगृह से 15 फीट दूर से ही शस्त्रों का दर्शन कर सकते है। मठ में प्रवेश के लिए मास्क में पहनना जरुरी है। एक बार में 40 से 50 श्रद्धालुओं को ही प्रवेश दिया जाएगा।
महंत ने बताया कंकाली मठ में 13वीं से 17वीं शताब्दी तक मां कंकाली की पूजा मठ में नागा साधु करते थे। 17वीं शताब्दी में मंदिर का निर्माण होने के पश्चात कंकाली माता की प्रतिमा को मंदिर में स्थापित किया गया। यहां तलवार, फरसा, भाला, ढाल, चाकू, तीर-कमान ये शस्त्र हजारों साल पुराने हैं।
यह है मान्यता
कंकाली मठ के पुजारी का कहना है कि कंकाली माता नौ दिनों तक अपने भक्तों की मुरादें पूरी करते करते थक जाती हैं। इसके बाद नवमी की रात 12 बजे वे कंकाली मठ में आकर आराम करती हैं। कंकाली मठ के दरवाजे भक्तों के लिए भी सिर्फ दशहरा के दिन ही खोले जाते हैं। कंकाली माता का यह मठ लगभग 500 साल पुराना है। यहां पहले नागा साधु तपस्या करते थे और माता की पूजा आराधना करते थे। तब से लेकर अब तक यह मान्यता चली आ रही है।
(दिनेश यदु की रिपोर्ट)
Published on:
15 Oct 2021 02:02 pm
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