
कार्तिकेय ने शेयर की जर्नी ( Photo - Patrika )
Chhattigarh Success Story: ताबीर हुसैन. यूपीएससी की सीएपीएफ असिस्टेंट कमांडेंट परीक्षा पास करना आसान नहीं है। लेकिन कार्तिकेय प्रसाद की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो कुछ असफल प्रयासों के बाद हिम्मत हार जाते हैं। 25 प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रयास करने के बाद आखिरकार कार्तिकेय ने सफलता हासिल की।
बलरामपुर के मूल निवासी कार्तिकेय के पिता कबीर प्रसाद सीआईएसएफ में असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर हैं, जबकि उनकी मां सुशीला बाई किसान और गृहिणी हैं। पिता की नौकरी के कारण कार्तिकेय ने देश के अलग-अलग हिस्सों में पढ़ाई की। उन्होंने केंद्रीय विद्यालय दुर्ग से पढ़ाई पूरी की और इसके बाद भिलाई के कॉलेज से स्नातक किया। उन्होंने रायपुर में रहकर नालंदा लाइब्रेरी से परीक्षा की तैयारी की।
कोविड के कारण उनकी तैयारी प्रभावित हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने यूपीएससी-सीएसई के 5 प्रयास, सीएपीएफ के 4 प्रयास समेत ईपीएफओ, आरबीआई ग्रेड-बी और अन्य कई परीक्षाएं दीं। लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हर बार अपनी कमियों को पहचाना और आगे बढ़ते रहे।
कार्तिकेय कहते हैं कि असफलता को अभिशाप मानने के बजाय उससे सीखना चाहिए। उनके मुताबिक, एक ही गलती को छह महीने तक दोहराने से बेहतर है कि छह महीने में छह गलतियां कर ली जाएं और समय रहते रास्ता बदल लिया जाए। उनका मानना है कि सही मेंटर भी तैयारी की दिशा सुधारने में बड़ी भूमिका निभाता है।
वे युवाओं को अखबार पढऩे, व्यावहारिक अनुभव लेने, समय प्रबंधन और अनुशासन पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। साथ ही मोबाइल में रील देखने को समय गंवाना मानते हैं।
Updated on:
12 Aug 2026, 5:22 PM IST
Published on:
12 Aug 2026, 5:22 PM IST
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