
प्रतीकात्मक फोटो
Chhattisgarh Medical Fraud: पीलूराम साहू की रिपोर्ट. अगर आप अस्पताल या क्लीनिक के बाहर लगे बोर्ड पर डॉक्टर की बड़ी-बड़ी डिग्रियां देखकर यह मान रहे हैं कि आपका इलाज सही हाथों में हो रहा है, तो सावधान हो जाइए। छत्तीसगढ़ में फर्जीवाड़े और ढुलमुल व्यवस्था का ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो सीधा आपकी और आपके परिवार की जान से जुड़ा है। प्रदेश में कई जगह मर चुके डॉक्टरों और दूसरों के रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल कर फर्जी डॉक्टर धड़ल्ले से अस्पताल चला रहे हैं और मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
पत्रिका की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि मरे हुए डॉक्टरों के इन्हीं एक्टिव पंजीयन नंबरों का फायदा उठाकर उनके परिचित या अन्य फर्जी लोग अस्पतालों में बेखौफ डॉक्टरी कर रहे हैं। इस गंभीर लापरवाही के पीछे सबसे बड़ी वजह छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल (सीजीएमसी) की लचर व्यवस्था है। राज्य गठन के बाद वर्ष 2001 में सीजीएमसी का गठन हुआ था। तब से लेकर आज तक डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन के नवीनीकरण (रिन्युअल) का कोई नियम ही लागू नहीं किया गया। नतीजा यह है कि बीते 25 सालों में जिन डॉक्टरों का निधन हो चुका है, उनके रजिस्ट्रेशन नंबर आज भी एक्टिव हैं।
अनुमान के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 100 से अधिक पंजीकृत डॉक्टरों का निधन हो चुका है, लेकिन रेकॉर्ड में वे आज भी जीवित दर्ज हैं। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने देश भर के मेडिकल काउंसिलों को हर 5 साल में डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन रिन्यू करने का स्पष्ट आदेश दिया है, लेकिन छत्तीसगढ़ में इस पर अमल नहीं हुआ। वर्तमान में सीजीएमसी में 15167 डॉक्टर पंजीकृत हैं। पिछले तीन महीनों का आंकड़ा जोड़ें तो यह संख्या 16 हजार के पार पहुंच जाती है। मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदेश में डॉक्टरों की वास्तविक संख्या इतनी है ही नहीं, क्योंकि इनमें से कई डॉक्टर विदेशों में (एनआरआई) बस चुके हैं तो कइयों की मौत हो चुकी है।
राजधानी रायपुर में ही 20 से ज्यादा ऐसे डॉक्टर हैं जो केवल एमडी (जनरल मेडिसिन) हैं, लेकिन अपने क्लीनिक के बोर्ड पर खुद को हार्ट स्पेशलिस्ट या कार्डियोलॉजिस्ट लिख रहे हैं। नियम के मुताबिक एंजियोप्लास्टी और दिल से जुड़ी गंभीर प्रक्रियाएं केवल विशेषज्ञ कार्डियोलॉजिस्ट ही कर सकते हैं। डेढ़ साल पहले एम्स के पास बिना पंजीयन और बिना नर्सिंग होम एक्ट के क्लीनिक चलाने वाले एक ऐसे ही फर्जी कार्डियोलॉजिस्ट पर कलेक्टर ने 20 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था।
केस-1 (गरियाबंद): छुरा इलाके में एक एमबीबीएस डॉक्टर दूसरे के रजिस्ट्रेशन नंबर का इस्तेमाल कर एनेस्थेटिस्ट (बेहोशी का डॉक्टर) बनकर काम कर रहा था। सीजीएमसी की जांच में यह फर्जीवाड़ा साबित हो चुका है और रिपोर्ट सीएमएचओ को सौंपी गई है, लेकिन उदासीनता के कारण अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
केस-2 (बिलासपुर): एक डॉक्टर फर्जी तरीके से खुद को जनरल सर्जन बताकर एक निजी अस्पताल में नौकरी कर रहा था। उसकी डिग्री फर्जी पाए जाने पर सर्जरी एसोसिएशन ने पंजीयन से इनकार कर दिया। सीजीएमसी में भी उसका कोई रजिस्ट्रेशन नहीं था। मामला उजागर होते ही यह फर्जी सर्जन फरार हो गया।
सवाल: प्रदेश में 16 हजार से ज्यादा डॉक्टर रजिस्टर्ड हैं, कइयों का निधन हो चुका है?
जवाब: हां, कई डॉक्टरों का निधन हो चुका है, लेकिन सटीक संख्या का आइडिया नहीं है।
सवाल: बिना रिन्युअल के मृतक डॉक्टरों का पता कैसे चलेगा?
जवाब: इसीलिए अब हर 5 साल में पंजीयन रिन्यू कराएंगे। इसका अनुमोदन मिल चुका है।
सवाल: मरे हुए या दूसरों के नंबर पर प्रैक्टिस क्यों हो रही है?
जवाब: शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाती है। जरूरत पड़ने पर एफआईआर भी दर्ज कराएंगे।
Updated on:
12 Aug 2026, 4:18 PM IST
Published on:
12 Aug 2026, 4:17 PM IST
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