
पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज रायपुर ( Phto - Patrika )
Chhattisgarh News: पीलूराम साहू की रिपोर्ट. पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी मद से खरीदे गए 8 ओटी (ऑपरेशन थिएटर) टेबल विवादों के घेरे में आ गए हैं। 'पत्रिका पड़ताल' में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि 35 लाख रुपए मूल्य की ओटी टेबल को करीब 75 से 80 लाख रुपए की अत्यधिक दरों पर खरीदा गया है। अस्पताल में नए ओटी टेबल लगाने के लिए कोल इंडिया और पॉवर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड ने मेडिकल कॉलेज को 12 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि दी थी।
उद्देश्य था कि कॉलेज से संबद्ध आंबेडकर अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाएं मिल सकें और मरीजों के ऑपरेशन में आसानी हो। लेकिन खरीदी में ओवररेट और गुणवत्ता की शिकायतों के बाद अब इस पूरे मामले ने प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। ओटी टेबल के ओवररेट और गुणवत्ता को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन ने एक विशेष जांच कमेटी का गठन किया था।
कमेटी ने मौके पर जाकर जब जांच की, तो रिपोर्ट में स्पष्ट कह दिया कि जो चाहिए वह नहीं है। जांच में पाया गया कि वेंडर द्वारा सप्लाई की गई ओटी टेबल टेंडर में तय किए गए स्पेसिफिकेशन (विशेषताओं) के अनुरूप नहीं हैं। यानी टेंडर में जिन खूबियों का उल्लेख किया गया था, वे भौतिक रूप से टेबल में मौजूद ही नहीं हैं। कमेटी की इस प्रतिकूल रिपोर्ट के सामने आने के बाद सीजीएमएससी ने संबंधित वेंडर का भुगतान रोक दिया है। इसके बाद से ही प्रदेश के एक कद्दावर जनप्रतिनिधि और एक सख्त आईएएस अधिकारी आमने-सामने आ गए हैं और यह पूरा मामला अब दिल्ली में लोकसभा तक पहुंच गया है।
प्रक्रिया के अनुसार, कोल इंडिया और पॉवर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड से सीएसआर फंड मिलने पर नेहरू मेडिकल कॉलेज के डीन व कंपनियों के बीच एग्रीमेंट हुआ था। इसके बाद खरीदी की जिम्मेदारी सीजीएमएससी को सौंपी गई। सीजीएमएससी ने दो अलग-अलग कंपनियों के हिसाब से टेंडर जारी किया और रेट फाइनल कर दिए। टेंडर प्रक्रिया के बाद 8 ओटी टेबल की सप्लाई भी कर दी गई और आंबेडकर अस्पताल के विभिन्न विभागों में इनका इंस्टालेशन करा दिया गया। एक कंपनी के वेंडर का पूरा पेमेंट पहले ही किया जा चुका है, जबकि दूसरे वेंडर का भुगतान शर्तों के अधीन अटका हुआ है।
वर्तमान में ये विवादित ओटी टेबल ऑर्थोपीडिक, आंको सर्जरी, जनरल सर्जरी, ऑब्स एंड गायनी, ऑप्थेलमोलॉजी और कैंसर विभाग में लगाई गई हैं। कैंसर विभाग में ब्रेकीथैरेपी के लिए एक विशेष ओटी टेबल रिजर्व रखा गया है। ऑर्थोपीडिक विभाग में लगाया गया टेबल रिमोट और ब्लूटूथ से चलने वाला एडवांस टेबल है। हालांकि, डॉक्टरों के मुताबिक इसमें अभी कुछ अतिरिक्त अटैचमेंट दिए जाने बाकी हैं, जिसके कारण यह पूरी तरह से चालू नहीं हो सका है, फिर भी जरूरत के हिसाब से इसका उपयोग किया जा रहा है।
इस करोड़ों रुपए के घपले और विवाद पर चिकित्सा शिक्षा विभाग से लेकर सीजीएमएससी के बड़े अधिकारी ऑन-रेकॉर्ड कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। जनप्रतिनिधि और आईएएस के बीच जारी खींचतान के कारण कोई भी अधिकारी इस पर टिप्पणी नहीं कर रहा है। जानकारों का कहना है कि प्रदेश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि ओटी टेबल इंस्टालेशन के तीन महीने बाद इतना बड़ा फर्जीवाड़ा और विवाद खुलकर सामने आया हो।
आंबेडकर अस्पताल अधीक्षक, डॉ. संतोष सोनकर ने कहा कि ओटी टेबल मेडिकल कॉलेज में आए सीएसआर फंड से खरीदा गया है। ओटी टेबल पूरी तरह इंस्टाल हुआ है या नहीं और इसका सही उपयोग किया जा रहा है या नहीं, फिलहाल इसकी पूरी जानकारी नहीं है। संबंधित विभागों से जानकारी लेने के बाद ही इस पर कुछ कहा जा सकेगा।
मामले में सीजीएमएससी का पक्ष जानने के लिए पत्रिका ने एमडी रितेश अग्रवाल को फोन किया तो उन्होंने कहा कि वह मीटिंग में व्यस्त है। बाद में बात करेंगे।
Updated on:
04 Aug 2026 11:30 am
Published on:
04 Aug 2026 11:30 am
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