
मां चंडिका को इष्ट देवी के रूप में पूजते थे राजा मोरध्वज
रायपुर @ शहर से करीब 35 किलोमीटर दूर रायपुर कोलकाता हाईवे (Raipur Kolkata Highway) पर बसे आरंग को राजा मोरध्वज की ऐतिहासिक राजधानी (Arang is the historical capital of King Mordhwaj) के साथ एक समृद्ध नगर माना जाता है। राजा मोरध्वज द्वारा इस क्षेत्र में कई मंदिरों का निर्माण कराने के साथ कई कहानी पुराणों (Story Puranas) से भी मिलती है। आरंग के पास रीवा गांव (Rewa Village near Arang) के पास पंचशील आदिशक्ति मां चंडिका का एक प्राचीन मंदिर (An ancient temple of Panchsheel Adishakti Maa Chandika ) है, जो लोगों के आस्था का केन्द्र है। इस मंदिर में चैत्र व क्वांर नवरात्रि (Chaitra and Kwar Navratri) में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्जवलित होता है।
पांच अलग-अलग रूपों में माता विराजमान
रीवा के सुरेन्द्र नशीने ने बताया पंचशील आदिशक्ति मां चंडिका (Panchsheel Adishakti Maa Chandika) अलग-अगल पांच रूपों में एक साथ मंदिर के गर्भगृह में विराजमान है। पहले माता जी एक छोटा सा चबूतरे में विराजमान थी। फिर हमारे पूर्वजों ने एक चबूतरे के साथ मंदिर का निर्माण किया। राजा मोरध्वज मां चंडिका को अपने इष्ट देवी के रुप में पुजते थे, राजा हर रोज सबसे पहले तालाब में स्नान कर माता की पूजा करने पहुंचते थे। इस मंदिर में नवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। तालाब में स्नान करने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
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21 बहिनिया व माता शीतला
चंडिका मंदिर के परिसर 21 बहिनिया व माता शीतला (21 sisters and mother Sheetla) का दो मंदिर बना हुआ है, इसके साथ लोगों ने माँ काली का मंदिर भी बनवाया है। ग्रामीणों का मानना है कि हमारे गांव में मां चंडिका देवी के रहते अभी तक किसी भी प्रकार विपत्ति नहीं आई है।
पांच सौ ज्योति कलश
मंदिर के पुजारी राजकुमार शर्मा बताया कि पिछले दो साल से कोरोना संक्रमण के चलते मंदिर में सिर्फ माता की जोत जलाया जाता रहा है, इस चैत्र नवरात्रि में भक्तों द्वारा 500 मनोकामना ज्योति कलश की कहानी के कारण ही इस नगर प्रज्जवलित किया गया है।
अपने बेटे को काटा था आरा से
पौराणिक कथाओं (mythology) में कहा जाता हैं कि महाभारत युद्ध (mahabharat war) के बाद भगवान कृष्ण व अर्जुन (Lord Krishna and Arjuna) राजा मोरध्वज (Raja Mordhwaj) की परीक्षा लेने आरंग पहुंचे थे। परीक्षा लेते समय कृष्ण द्वारा एक भूखे शेर के खाने के लिए मोरध्वज को अपने बेटे का मांस लाने को कहा गया। तब राजा ने अपने बेटे ताम्रध्वज को आरी से चीरकर उसका मांस शेर के सामने पेश किया। आरे से चीरने की कहानी के कारन इस नगर का नाम आरंग है।
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Updated on:
06 Apr 2022 10:10 am
Published on:
06 Apr 2022 10:08 am

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