
छालीवुड के सिकंदर माने जाते हैं सतीश जैन।
ताबीर हुसैन @ रायपुर. निर्देशक सतीश जैन ने छत्तीसगढ़ी सिनेमा को एक ऐसे मुकाम तक पहुंचाया जहां से इंडस्ट्री की ऊंचाई मापी जा सकती है। 22 सालों में उन्होंने छह फिल्में बनाई, सभी सफल रहीं। लेकिन एक फिल्म ऐसी भी थी जिसके सुपरहिट होने के बावजूद उन्होंने प्रोडक्शन से तौबा कर ली। यह फिल्म थी 'झन भूलो मां-बाप ल'। प्रोड्यूसर में नाम उनके पिता शिवदयाल जैन का था। सतीश ने बताया, 2000 में 'मोर छइंहा-भुंइया' की सफलता के बाद मैंने अनुज शर्मा को लीड लेकर 2003 झन भूलो मां-बाप ल बनाई। तीन दिनों तक पब्लिक का रेस्पांस नहीं मिला। हमको लगा कि फिल्म गई डब्बे में। चौथे दिन से फिल्म ने जो पिकअप पकड़ा वह दिनों दिन बढ़ता गया। रायपुर मेें भले यह फिल्म 12 हफ्ते चली लेकिन बिलासपुर के गंगाश्री में लगातार 25 हफ्ते चली। दुर्ग शारदा में 22, चंद्रा भिलाई में 23 और बाकी 10 सेंटर में 100 दिन का कारोबार किया। वैसे अनुज शर्मा का दावा है कि यह फिल्म बिलासुपर में 28 हफ्ते चली थी।
पांच लाख का हुआ था नुकसान
जैन की मानें तो फिल्म का बजट करीब 95 लाख रुपए था। कुल कारोबार 1 करोड़ 40 लाख का हुआ। क्योंकि उस जमाने में 10 और 20 रुपए टिकट दर हुआ करती थी। टॉकीजों से मेरा 50 परसेंट का रेशियो था। इस हिसाब से मुझे 70 लाख सिनेमाघरों से मिले। 20 लाख रुपए में मैंने फिल्म के राइट्स बेच दिए। कुल 90 लाख रुपए हासिल हुए, फिर भी मैं पांच लाख रुपए घाटे में रहा। तब से मैंने कान पकड़ा कि अब सिर्फ निर्देशन करना है, प्रोड्यूस करना मेरे बस की बात नहीं।
चल हट कोनो देख लीही, नतीजे पब्लिक तय करेगी
जैन निर्देशित सातवीं फिल्म' चल हट कोनो देख लीही' 13 मई को रिलीज हो रही है। इससे उन्हें काफी उम्मीदें हैं। वे कहते हैं, झन भूलो... का नाम ऐसा था कि लोगों को लगा कि फिल्म पैनिक होगी। इसलिए पब्लिक का रेस्पांस शुरुआती दिनों में नहीं मिला। चल हट... के लिए हमने खूब मेहनत की है, अब नतीजे पब्लिक तय करेगी।
Published on:
12 May 2022 12:17 am
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