
कुशाभाऊ पत्रकारिता विश्वविद्यालय का नाम अब चंदूलाल चंद्राकर होगा
रायपुर. छत्तीसगढ़ में राजनीतिक संस्थाओं के नामकरण को लेकर नई राजनीति शुरू हो गई है। मंगलवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में कुशाभाऊ पत्रकारित विश्वविद्यालय का नाम बदलकर चंदूलाल चंद्राकर विश्वविद्यालय करने का फैसला लिया गया। इसके अलावा कामधेनु विश्वविद्यालय का नाम भी चंदूलाल चंद्राकर के नाम से होगा। चंद्राकर लंबे समय तक दुर्ग लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के सांसद रहे हैं। इसे लेकर भाजपा ने अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी बाजपाई के हाथों से प्रारंभ हुई कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय का नाम बदल दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार केवल संस्थाओं व हमारी सरकार के समय से संचालित योजनाओं का राजनैतिक दुर्भावना से बदल रही है।
कौशिक ने कहा कि राजनीतिक विद्वेषवश नाम बदलने की परिपाटी निंदनीय है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह पंद्रह वर्ष सत्ता में रहने के दौरान भाजपा अगर नेहरू परिवार के सभी लोगों के नाम पर स्थापित संस्थानों का नाम बदल देती तो कांग्रेस को कैसा लगता?
नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि इससे पहले भी हमारे मनीषी पंडित दीनदयाल उपाध्याय के नाम पर स्थापित संस्थाओं का नाम भी उनकी पुण्यतिथि के दिन ही बदल देने का दुराग्रह दिखाया था। यह राजनीतिक अशिष्टता है। उन्होंने कहा कि अभी प्राथमिकता में कोरोना जैसे घोषित महामारी से निपटने की चुनौती सामने है। ऐसे में प्रदेश शासन अपना समय ऐसे विषयों में बर्बाद कर रही है इससे पता चलता है कि प्रदेश शासन कितना गंभीर है। उन्होंने कहा कि पुरानी संस्थाओं पर भड़ास निकालने के बजाय नए संस्थानों का निर्माण प्रदेश के महापुरुषों के नाम रखना चाहिए।
Published on:
25 Mar 2020 06:31 pm
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