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फिर सक्रिय हुए भूमाफिया, जिसे कलेक्टर ने कराया था बंद उसी में फिर काम शुरु

खास बात यह है कि जिस खसरा नंबर से अवैध प्लॉटिंग पर कार्यवाही की शुरुआत कलेक्टर ने की थी उसी खसरा के ब्लॉक नहीं होने का फायदा भूमाफिया उठा रहे हैं।

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रायपुर। परसुलीडीह में अवैध प्लॉटिंग फिर शुरू हो गई है। पत्रिका को मिली जानकारी के मुताबिक खसरा क्रमांक 42/4 में 4 एकड़ से ज्यादा जमीन पर मुरुम डालकर रास्ता बना दिया गया है। जैसे ही कलेक्टर की अवैध प्लॉटिंग पर कार्रवाई धीमी पड़ी है वैसे ही फिर से भूमाफिया सक्रिय हो गए हैं। खास बात यह है कि जिस खसरा नंबर से अवैध प्लॉटिंग पर कार्यवाही की शुरुआत कलेक्टर ने की थी उसी खसरा के ब्लॉक नहीं होने का फायदा भूमाफिया उठा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि कलेक्टर ने अवैध प्लॉटों पर कार्रवाई करना सबसे पहले परसुलीडीह से ही शुरू किया था। खसरों को भी ब्लॉक किया गया था। अब प्रशासन ने इस ओर ध्यान देना बंद किया तो फिर से बड़े पैमाने पर अवैध प्लॉटिंग शुरू कर दी गई। बीते चार साल से पसुलीडीह अवैध प्लॉटिंग का गढ़ बना हुआ है। इससे पहले भी दर्जनों लोगों ने अवैध प्लॉटिंग की और वीआईपी सिटी के पास 30 एकड़ में अवैध प्लॉटिंग कर दी है।

अवैध प्लाटिंग की सूची में फंस रहे हैं किसान
अवैध प्लाटिंग यानी कि बिना ले आउट और डायवर्सन के भूमि का उप विभाजन किया जा रहा है। अवैध प्लॉटिंग की सूची में रसूखदार बिल्डरों की बजाय सर्वाधिक किसानों के नाम हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि सारे कालोनाइजर और बिल्डर कायदे से चल रहे हैं। एक बिल्डर ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया कि वे लोग किसानों से सीधे सौदा कर टुकड़ों में प्लाट की रजिस्ट्री कराते हैं। इसका फायदा यह रहता है कि एकड़ के भाव में खरीदी गई जमीन की वह कई गुना दर पर वर्गफुट में बिक्री करने में सफलता मिलती है और उनकी संलग्नता भी नजर नहीं आती।

इन खसरा नंबरों पर अवैध प्लाटिंग और निर्माण
परसुलीडीह में राजस्व अधिकारियों ने खसरा नम्बर 42/4, 61/1, 61/3, 61/4, 427, 45/4, से लेकर 60/5 तक कुल 30 एकड़ पर अवैध प्लाटिंग की रिपोर्ट दी है। पटवारी ने कुल 20 से ज्यादा खसरा नंबर की रिपोर्ट तहसील कार्यालय में प्रस्तुत कर दी है। अधिकांश खसरा नंबरों की जमीन पर निर्माण भी शुरू हो गया है।

कार्रवाई से कतरा रहे हैं अधिकारी
पत्रिका पड़ताल में जानकारी सामने आई कि टीएनसी से कोई भी पत्र खसरा नंबर की जानकारी के लिए राजस्व विभाग को नहीं भेजा गया। ऐसे में साफ होता है कि खसरा नंबर नहीं मिलने का बहाना करके टीएनसी के अधिकारी कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।

सभी अवैध प्लाटिंग की रिपोर्ट तहसील कार्यालय में प्रस्तुत कर दी है। आगे की कार्रवाई तहसील स्तर पर होगी।
- नीरज पटनायक, पटवारी, परसुलीडीह