
राजा दशरथ की तरह शद्बभेदी विद्या जानते थे पृथ्वीराज
नवापारा-राजिम . चौहान वंष के हिन्दू क्षत्रिय सम्राट पृथ्वीराज चौहान का 814वीं पुण्यतिथि नवापारा के राजपूत चौहान समाज के द्वारा मनाई गई। इस अवसर पर आरंग राज के उपाध्यक्ष चेतन चौहान ने कहा कि पृथ्वीराज चौहान में दयालुतापन बहुत था। उन्होंने मोहम्मद गौरी को अनेकों बार हरा कर प्राणदान दिए थे। पृथ्वीराज चौहान राजा दशरथ के समान शब्दभेदी विद्या का ज्ञान था। इसी कारण मोहम्मद गौरी के द्वारा उसे अंधा कर दिया गया था।
पृथ्वीराज चौहान के राजदरबारी कवि और परममित्र चंदरबरदाई ने कहा कि 'चार बांस चौबीस गज, अंगुल अष्ट प्रमाप ता उपर सुल्तान है 'मत चुको चौहानÓ इस शब्द को सुनकर पृथ्वीराज चौहान ने प्राणघाती बाण मोहम्मद गौरी की ओर छोड़ा और यही प्राणघाती बाण सीधे मोहम्मद गौरी के सीने में लगा और मृत्यु को प्राप्त हुए। इसी के साथ पृथ्वीराज चौहान और चंदरगरदाई 15 मार्च 1206 को वीरगति प्राप्त हुए।
हमें अपने वंश पर गौरव होना चाहिए। हमें समाज में पनप रहे सामाजिक बुराइयां को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। ये प्रयास तभी सफल होगा जब सभी सामाजिक बंधु जो शासकीय सेवाओं में कार्यरत है वे अपना समय सामाजिक गतिविधियों में दें। ताकि समाज का उत्थान हो सके।
नवापारा के राजपूत चौहान समाज के अध्यक्ष कृष्ण कुमार चौहान ने कहा कि समाज में अनेक प्रकार के व्यक्ति होते हैं, जिसकी सोच अलग-अलग होती हैै। समाज तभी मजबूत और संगठित होगा जब सभी लोग एकजुट होकर एक ही स्थान पर बैठकर अपना विचार रखेंगे। हमारा प्रयास तो यह है कि हमारा राजपूत चौहान समाज में प्रतिदिन गतिविधियां होती रहे जिससे सामाजिक बंधुओं को अपनी पहचान मिलती रहे। इस अवसर पर विजय कमल, विनय, रवि, लच्छु, लक्ष्मण, धन्ना, रामसिंग, अजय विजय, रमेश, राजेश, टीकम सिंह चौहान सहित समस्त स्वजाति बंधु इस अवसर पर पृथ्वीराज चौहान के छायाचित्र को अपने घर के आंगन पर रखकर दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा अर्चना की गई।
Published on:
16 Mar 2020 12:57 am
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
