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2019 लोकसभा चुनाव प्रचार का बदला स्वरूप, बैनर पोस्टर अब मोबाइल स्क्रीन पर

राजधानी में चुनाव प्रचार सामग्री बेचने वालों की दुकानों में सन्नाटा पसरा हुआ है।वॉइस कॉल के जरिए पार्टी के निशान पर वोट करने की अपील भी कर रहे हैं और वीडियो के जरिए भी चुनाव प्रचार कर रहे हैं।

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lok sabha CG

2019 लोकसभा चुनाव प्रचार का बदला स्वरूप, बैनर पोस्टर अब मोबाइल स्क्रीन पर

रायपुर। लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। सभी दलों के प्रत्याशी मैदान में कूद पड़े हैं। लेकिन राजधानी में चुनाव प्रचार सामग्री बेचने वालों की दुकानों में सन्नाटा पसरा हुआ है। राजधानी में चुनाव प्रचार साम्रगी बेचने वाले चार ही बड़े विक्रेता रह गए हैं। लेकिन उनके पास भी कोई खास ग्राहक नहीं है। जबकि दूसरी ओर रायपुर में दो दर्जन से अधिक ऐसी एजेंसियां खुल गई हैं, जो प्रत्याशियों के लिए डिजिटल कैंपेनिंग कर रहे हैं। वॉट्सएप, फेसबुक, ट्विटर के जरिए लोगों को त्योहारों की शुभकामनाएं दे रहे हैं।

साथ ही वॉइस कॉल के जरिए पार्टी के निशान पर वोट करने की अपील भी कर रहे हैं और वीडियो के जरिए भी चुनाव प्रचार कर रहे हैं। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2019 में 30 से 40 फीसदी पारंपरिक प्रचार सामग्री कम हो गई है। इसे सोशल मीडिया या डिजिटल कैंपेनिंग के जरिए पूरा किया जा रहा है।

आयोग की सख्ती का भी बाजार पर असर
झंडे, बैनर और पोस्टर जैसे पारंपरिक प्रचार सामग्रियों के विक्रेताओं का कहना है कि चुनाव आयोग की सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है। पूरे दस्तावेज बिल-रसीद पास होने के बावजूद सख्ती कम नहीं होती। इस वजह से प्रत्याशी बड़े पैमाने में सामान नहीं खरीद रहे। निर्वाचन खर्च बचाने के लिए अपने नाम की बजाए पार्टी के रंग से द्वार-तोरण आदि बनवा रहे हैं। जिससे प्रचार भी हो जाए और प्रत्याशी के खाते में खर्च भी ना जुड़े। चुनाव प्रचार समाग्रियों के प्रमुख विक्रेता का कहना है कि पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार समाग्रियों की खरीदी-बिक्री काफी कम है। आयोग की सख्ती को देखते हुए प्रत्याशी बड़े पैमाने पर प्रचार सामग्री नहीं खरीद रहे।

छत्तीसगढ़ में 1.66 करोड़ मोबाइल कनेक्शन
राज्य निर्माण के समय मोबाइल कनेक्शन की संख्या लगभग नहीं के बराबर थी। लेकिन पिछले 18 सालों में ये बढ़कर 1.66 करोड़ तक पहुंच गई। आईटी एक्सपर्ट के मुताबिक 2013 में टेली डेनसिटी 54 फिसदी थी। मतलब 100 लोगों में से 54 के पास मोबाइल हुआ करता था। अब ये बढ़कर 64 फीसदी हो गया है। इस तरह 2013 में प्रति व्यक्ति 400 एमबी डाटा उपयोग करता था। लेकिन वर्तमान में ये बढ़कर 9000 एमबी हो गया है। यानी 20 गुना ज्यादा।