एक केस को देखें तो रायपुर की प्रिया (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उन्होंने 28 साल की उम्र में शादी कर ली थी। लेकिन, प्रोफेशनल लाइफ को देखते हुए बेबी प्लानिंग में लेटलतीफी की। 2 साल पहले 35 साल की उम्र में उन्होंने एक लड़के को जन्म दिया। तब तक पति भी 42 साल के हो चुके थे। आज उनका बच्चा ऑटिज्म की बीमारी से पीड़ित है। 2 साल का होने के बाद भी 6 महीने के बच्चे की तरह व्यवहार करता है। डॉक्टर ने इसके लिए माता-पिता की बड़ी उम्र को जिम्मेदार बताया।
गौरव शर्मा
रायपुर. समय के साथ प्राथमिकताएं भी बदली हैं। पुरुष ही नहीं, आज महिलाएं भी अपने कॅरिअर पर ज्यादा फोकस कर रहीं हैं। इसके चलते शादियां अधिक उम्र में होने लगी हैं। अब इसके दुष्परिणाम नई पीढ़ियों में नजर आ रहे हैं। अधि उम्र में बेबी प्लान करने से बच्चों में कई तरह की विसंगतियां आ रहीं हैं।
एक्सपर्ट्स की मानें तो 35 से 40 वर्ष से अधिक उम्र में शादी के बाद पैदा होने वाले बहुत से बच्चे सामान्य बच्चों से अलग हैं। ऐसे बच्चों में बड़े होने के बाद भी समझ की कमी देखने को मिल रही है। जैसे कोई 8 साल का है तो वह 2 साल के बच्चे जैसा दिमाग रखता है। इसके अलावा माता-पिता की बातों पर ध्यान देने के बजाय अपने में ही व्यस्त रहना और छोटी-छोटी बातों पर डर जाना भी विसंगतियों में शामिल है। इस बीमारी को ऑटिज्म कहा जाता है। ऐसे बच्चों की ग्रोथ काफी कम होती है। वे सामान्य बच्चों की तुलना में हर स्तर से कमजोर रहते हैं। डॉक्टर बताते हैं कि शादी और मां बनने की उम्र आइडियल हो तो काफी अच्छा रहता है। 30 साल की उम्र तक शादी और बच्चे हों तो बहुत अच्छा है। हालांकि, भागदौड़ भरी होती जिंदगी में चुनौतियां भी बढ़ रहीं है जिसके कारण कई बार ऐसा कर पाना संभव नहीं हो पाता।
क्या है ऑटिज्म, जानिए
ऐसे बच्चे जो नाम से बुलाने या सामान मांगने पर ध्यान नहीं देते हैं। 4 साल के बच्चे आपके पास आते हैं तो रिएक्ट करते हैं, लेकिन ऑटिज्म के शिकार बच्चे कोई रिएक्ट नहीं करते हैं। वे सामानों पर ज्यादा अट्रैक्ट होते हैं। ऐसे बच्चों का इंसानों से लगाव कम होता है। वे सामानों को तो अच्छी तरह देखते हैं। उस पर रिएक्ट करते हैं, लेकिन आसपास जो इंसान होते हैं, उन्हें देखकर कोई रिएक्शन नहीं देते।
एक्सपर्ट व्यू
आनुवांशिक बीमारियों में ऑटिज्म आम है। हालांकि, लोगों की बदलती लाइफ स्टाइल और अधिक उम्र में शादी करने की वजह से भी अब ये समस्या सामने आ रही है। मां की उम्र अगर 35 साल से अधिक है तो इसका असर निश्चित रूप से बढ़ जाता है। इसके अलावा बच्चा होने के वक्त पुरुषों की उम्र अधिक हो तो डीएनए और म्यूटेशन की गतिविधि बढ़ जाती है। इससे बच्चों में ऑटिज्म, चाइल्डहुड ल्यूकीमिया, बायपोलर डिसऑर्डर जैसी बीमारियां पाई जाती हैं।
डॉ. नीलय मोझरकर, पीडियाट्रिशियन