
MBBS बांड पोस्टिंग में मेरिट का खेल बदला (photo source- AI)
रायपुर@पीलूराम साहू। MBBS Bond Posting: सरकारी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप पूरी कर चुके एमबीबीएस छात्रों के दो साल की बांड पोस्टिंग के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। प्रथम मेरिट सूची 13 सितंबर को, जबकि अंतिम मेरिट सूची का प्रकाशन 17 सितंबर को किया जाएगा। इस बार भी पिछले साल की तरह एमबीबीएस में कुल प्राप्तांकों के आधार पर मेरिट सूची बनाई जाएगी, ताकि किसी तरह का विवाद न हो।
पहले बांड पोस्टिंग में भाई-भतीजावाद के आरोप लगते रहे हैं। बांड पोस्टिंग नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को भी इन डॉक्टरों के इलाज का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अब मेडिकल कॉलेजों में भी इन छात्रों को जूनियर रेजिडेंट की तरह पोस्टिंग दी जा रही है। इससे छोटे मेडिकल कॉलेजों में मरीजों के इलाज में मदद मिलती है। पहले पोस्टिंग स्वास्थ्य विभाग करता था, लेकिन पिछले दो साल से डीएमई काउंसिलिंग करवा रहा है।
एमबीबीएस की इंटर्नशिप पूरी कर चुके छात्रों के लिए दो साल की सेवा अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें हेल्थ साइंस विश्वविद्यालय से स्थायी डिग्री नहीं मिलेगी। छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में स्थायी पंजीयन भी नहीं होगा। छात्रों को सामान्य क्षेत्र के लिए हर माह 57,150 रुपए और अनुसूचित क्षेत्र के लिए 69,850 रुपए मानदेय दिया जा रहा है।
छात्र मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक मांग पूरी नहीं हुई है। पिछले माह स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मिलकर छात्रों ने इंटर्न समेत अन्य स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग की थी। हालांकि, अब तक इस संबंध में कोई निर्णय नहीं हुआ है। दरअसल, मंत्री ने अगस्त में बढ़ा हुआ स्टाइपेंड घोषित करने का आश्वासन दिया था।
एमबीबीएस छात्रों को कोर्स पूरा करने के बाद एक साल के बांड का लाभ 2031 में मिलेगा। यह नियम 2025 बैच में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए लागू कर दिया गया है। यानी छात्र जब साढ़े चार साल का कोर्स और एक साल की इंटर्नशिप पूरी कर लेंगे, तब वे दो साल के बजाय एक साल की बांड सेवा में जाएंगे।
इस संबंध में पिछले साल राज्य शासन ने आदेश जारी किया था। वर्ष 2024 से बिना नियम बनाए दो साल के बांड में छात्रों की पोस्टिंग मेडिकल कॉलेजों में की जा रही है। जबकि पहले जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में पोस्टिंग होती थी। पहले इसे दो साल की ग्रामीण सेवा भी कहा जाता था, लेकिन अब बांड पोस्टिंग पूरी तरह बदल गई है।
डॉ. विष्णु दत्त, पूर्व डीएमई, छत्तीसगढ़ के मुताबिक, बांड पोस्टिंग का असल उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में डॉक्टरों की पोस्टिंग करना था। अब मेडिकल कॉलेजों में भी पोस्टिंग की जा रही है। इससे मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पतालों में जूनियर रेजिडेंट की कमी पूरी हो रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को इलाज के लिए अब भी शहरी अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ रही है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टिंग होने पर मरीजों को बेसिक इलाज के लिए एमबीबीएस डॉक्टर मिल जाता था।
Updated on:
13 Sept 2026 12:56 pm
Published on:
13 Sept 2026 12:56 pm
