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रायपुर की प्रियंका का रिसर्च, बबूल की पत्तियों से बनाई डायबिटिक के लिए दवा

प्रियंका का रिसर्च पेटेंट भी हो चुका, एंटी मॉस्किटो प्रोजेक्ट पर काम कर रहीं

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रायपुर की प्रियंका का रिसर्च, बबूल की पत्तियों से बनाई डायबिटिक के लिए दवा

रायपुर के रविवि में अपना रिसर्च प्रेजेंट करती प्रियंका।

ताबीर हुसैन @ रायपुर.हमारे देश केपिटल ऑफ डायबिटीज बन चुका है। शुगर के मरीज के साथ सबसे बड़ी समस्या यह रहती है कि उनका घाव आसानी से नहीं भरता। लेकिन अब इसका इलाज भी संभव है। राजधानी की रिसर्चर प्रियंका पांडे ने बबूल की पत्तियों से ऐसी दवा तैयार की है जिससे घाव तो भरेंगे ही अलग से एंटीबॉयोटिक की जरूरत भी नहीं होगी। रविवि में चल रहे यंग साइंटिस्ट कॉन्फ्रेंस में उन्होंने अपने रिसर्च को प्रेजेंट किया। पत्रिका से बातचीत में प्रियंका ने बताया, छत्तीसगढ़ को हर्बल डेजिग्नेशन का दर्जा मिले बरसों हो गए लेकिन हर्बल पर ज्यादा रिसर्च नहीं किया जा रहा है। मैंने तय किया कि हमारी ही मिट्टी में बहुतायात में उपजे बबूल से दवा तैयार करूं। इस दवा का पेटेंट भी हो चुका है।

चूहों पर किया एक्सपेरिमेंट

यह दवा नॉर्मल और डायबिटिक दोनों के लिए कारगर रहेगी। इसके लिए मैंने चूहों पर एक्सपेरिमेंट किया, क्योंकि वे फिजियोलॉजी और एनॉटमी में ह्यूमन बॉडी से सिमलर होते हैं। इस खोज के लिए मैंने करीब ढाई साल दिए। हर्बल से बनी होने के कारण यह सस्ती दवा होगी।

बैक्टीरिया जो खाएगा मच्छर के अंडे

प्रियंका ने पत्रिका को बताया, मैं इन दिनों एंटी मॉस्किटो प्रोजेक्ट पर रिसर्च कर रही हूं। एक ऐसा बैक्टीरिया जिसका भोजन ही मच्छर और उसके अंडे हैं। इस रिसर्च से राज्य को मॉस्किटो फ्री स्टेट बनाया जा सकता है।