22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बीच शहर में है ये छोटा वन जहां आते ही 4 डिग्री कम हो जाता है तापमान

शहर में आज भी एक ऐसा छोटा सा वन है जहां हरियाली तो है ही साथ ही यहां पर 165 प्रकार के पक्षी भी पाए जाते हैं

2 min read
Google source verification
CGNews

बीच शहर में है ये छोटा वन जहां आते ही 4 डिग्री कम हो जाता है तापमान

सरिता दुबे@रायपुर. सडक़ बनने से शहर की हरियाली कम हो गई है लेकिन शहर में आज भी एक ऐसा छोटा सा वन है जहां हरियाली तो है ही साथ ही यहां पर 165 प्रकार के पक्षी भी पाए जाते हैं। इस वन के कारण ही शहर में अच्छी बारिश होती है। यहां आते ही ठंडक महसूस होती है। भले ही शहर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस हो जाए लेकिन यहां पर तापनाम 4 डिग्री सेल्सियस कम ही रहता है। यहां कोई जंगली जानवर तो नहीं है बल्कि यहां पर कई पक्षियों का घर है। इस वन परिसर में आते ही तापमान शहर के तापमान से 4 से 5 डिग्री तक कम हो जाता है। हम बात कर रहे है रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी, राजकुमार कॉलेज, साइंस कॉलेज और आयुर्वेदिक कॉलेज के इस परिसर की जहां 30 एकड़ से अधिक एरिया में पेड़-पौधे लगे है।

कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जी.एस. बघेल कहते हंै कि साल 1980 में जब इस परिसर में चिडिय़ा पहुंचती थी तो वो फडफड़़ाकर गिर पड़ती थी लेकिन आज ये परिसर कई पक्षियों का आश्रय स्थल है। वे कहते हंै कि आजकल लोगों ने फलदार पेड़ लगाना ही बंद कर दिया है। आज से 20 साल पहले शहर में जगह-जगह फल के पेड़ नजर आते थे लेकिन आज कुछ एक जगह पर पेड़ तो दिखाई देते है लेकिन वो भी केवल छाया देने का ही काम करते है। लोगों को फलदार पौधा लगाना चाहिए। समय के साथ-साथ हम नेचर से दूर होते जा रहे है लेकिन आयुर्वेदिक कॉलेज के परिसर में आते ही ये अहसास होता है कि हम नेचर के करीब है।

कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनने से थोड़ी कम हुई हरियाली
आयुर्वेदिक कॉलेज के प्रो. संजीव शुक्ला ने बताया कि पहले तो विवेकानंद आश्रम से से ही तापमान कम हो जाता था। लेकिन विवेकानंद आश्रम से आगे साल 1992 में कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनने से यहां थोड़ी हरियाली तो कम हुई है साथ ही यहां से ही तापमान कम होने का दायरा थोड़ा आगे बढ़ गया। अब तापमान केवल आयुर्वेदिक कॉलेज में ही कम महसूस होता है। आज भी यदि शहर का हर व्यक्ति अपने घर में एक पौधा भी लगाता है तो कहीं न कहीं वो पर्यावरण को शुध्द रखने का काम करेगा।

आयुर्वेदिक कॉलेज है इस वन का खास हिस्सा
आयुर्वेदिक कॉलेज में बने औषधीय पौधों और अन्य पौधों को मिलाकर कुल 254 प्रजाति के पौधे लगे है। प्रो. राजेश सिंह ने बताया कि वैसे तो रविवि, आरकेसी और साइंस कॉलेज और आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर को मिलाकर ही ये छोटा सा वन बनता है लेकिन इसमें आयुर्वेदिक कॉलेज का ही हिस्सा ही सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि 70 फीसदी भाग आयुर्वेदिक कॉलेज का है। यहां 7 हजार बड़े पेड़ है वहीं हजारों की संख्या में छोटे पौधे लगे है। कॉलेज के स्टूडेंट्स यहां पर प्रेक्टिस करने आते है। इसके साथ ही पूरा ये परिसर वन विभाग के अधीन ही है।