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आर्य समाज में हुई शादियों का रजिस्ट्रेशन नगर निगम ने रोका

अब तक इन्हीं प्रमाण पत्रों के आधार पर रजिस्ट्रेशन, निगम लेगा लीगल एडवाइजर्स की मदद

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आर्य समाज की शादियां मान्य, सर्टिफिकेट नहीं; रोका पंजीयन

आर्य समाज की शादियां मान्य, सर्टिफिकेट नहीं; रोका पंजीयन

रायपुर. आर्य समाज की शादियां तो मान्य हैं, लेकिन एक मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यहां से मिलने वाले सर्टिफिकेट की मान्यता सवालों के घेरे में आ गई है। नगर निगम आर्य समाज मंदिर में होने वाले विवाह का पंजीयन अब तक इसी प्रमाण पत्र के आधार पर करते आया है। अब पंजीयन कैसे हो, इस पर असमंजस है। इसी संशय का समाधान निकालने के लिए निगम अब लीगल एडवाइजर्स की मदद लेगा।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 3 दिन पहले एक मामले में टिप्पणी करते हुए कहा, आर्य समाज को शादी के प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार नहीं है। अब तक आर्य समाज मंदिर में होने वाली शादियों का नगर निगम में रजिस्ट्रेशन इसी आधार पर होता था। नगर निगम अब लीगल एडवाइजर्स से चर्चा कर इसका उपाय निकालने की कोशिश में है, ताकि विवाह प्रमाण पत्र लीगल तरीके से जारी किए जा सकें। इधर, शहर के सबसे पुराने बैजनाथपारा स्थित आर्य समाज मंदिर में प्रतिदिन 2 से 3 शादियां हो रहीं हैं। शनिवार और रविवार को निगम कार्यालय बंद होने से पंजीयन नहीं हो सका। अब पंजीयन ही रुक गए हैं। सोमवार को भी बैजनाथपारा में 2 जोड़ों की शादी हुई। विवाह के लिए 4 से ज्यादा आवेदन भी आए।

115 साल पुराना है आर्य समाज मंदिर 29 हजार शादियां हुईं

बैजनाथपारा स्थित आर्य समाज का मंदिर 115 साल पुराना है। मंदिर के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण महतो ने बताया, 1907 में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लाला लाजपत राय रायपुर आए थे। तब इसकी स्थापना की गई थी। उस वक्त अंतरजातीय विवाह को लेकर समाज में जागरूकता का अभाव था। अन्य जातियों में शादी करना काफी मुश्किल था। आर्य समाज मंदिर में इसकी शुरुआत हुई और बड़ी संख्या में लोग यहां आकर शादी करने लगे। रायपुर में अब तक 29 हजार से ज्यादा जोड़ों की शादी करवाई जा चुकी है।

एक्सपर्ट व्यू

1937 का कानून: आर्य समाज को शादी की देता है मान्यता

आर्य समाज को अंग्रेजों के जमाने से शादी कराने की मान्यता मिली हुई है। आर्य विवाह विधिमान्यकरण- 1937 आर्य समाज को शादी करवाने का अधिकार देता है। ऐसे में यह भ्रम दूर कर लिया जाना चाहिए कि आर्य समाज में होने वाली शादियां वैध नहीं। सभी शादियां वैध हैं। बात इनके प्रमाणीकरण की है जिसके आधार पर ही विवाह को कानूनी मान्यता मिलती है। शासकीय योजनाओं का लाभ लेने, कोर्ट-कचहरी के पति-पत्नी से संबंधित मामलों में कानूनी प्रमाण ही काम आते हैं। इसमें आर्य समाज का मैरिज सर्टिफिकेट काम नहीं आएगा।

1954-55 का कानून: सक्षम प्राधिकारी ही विवाह को प्रमाणित करेंगे

शादी कराना और बात है, दस्तावेजी प्रमाणीकरण और बात। ङ्क्षहदू विवाह अधिनियम 1955 और विशेष विवाह अधिनियम 1954 के तहत कानूनी तौर पर विवाह को प्रमाणित करने के लिए सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार केवल सक्षम प्राधिकारी को ही है। गौरतलब है कि आर्य समाज में भी वर-वधु यदि ङ्क्षहदू हैं तो ङ्क्षहदू मैरिज एक्ट 1955, ङ्क्षहदू नहीं होने पर विशेष विवाह अधिनियम 1954 के अंतर्गत शादियां कराई जाती हैं। वर-वधु मुस्लिम, क्रिश्चन या ज्यूस के हों तो आर्य समाज इनकी शादी नहीं करवा सकता।
- जैसा अधिवक्ता शिखर परगनिहा ने बताया।

सर्टिफिकेट के आधार पर पंजीयन रोका

निगम के स्वास्थ्य अधिकारी विजय पांडेय ने बताया कि सर्टिफिकेट को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के संबंध में लीगल एडवाइजर्स से चर्चा कर रहे हैं। तब तक आर्य समाज मैरिज सर्टिफिकेट के आधार पर पंजीयन रोका गया है।