
छत्तीसगढ़ में 30 हजार नालों को किया जाएगा रिचार्ज, ताकि किसानों को खेती के लिए मिले पर्याप्त पानी
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नरवा मिशन से छत्तीसगढ़ में सिंचित क्षेत्र बढ़ेगा और अधिकांश जगह कृषि के लिए जल उपलब्ध होगा। निस्तार के लिए भी पानी की कमी की समस्या काफी हद तक दूर हो सकेगी। साथ ही जैव विविधता (बायो डायवर्सिटी) का संवर्धन होगा।
मानसून सीजन में नरवा विकास कार्यक्रम के तहत प्रदेश के लगभग 30 हजार नालों को रिचार्ज करने के लिए चयनित किया गया है। प्रथम चरण में 9541 नरवा के उपचार की स्वीकृति दी गई है। नालों का उपचार करने के लिए नरवा विकास कार्यक्रम के तहत नालों में वर्षा के जल को रोकने हेतु लूज बोल्डर चेक, चेकडेम, गली प्लग, कंटूर ट्रेंच, स्टाप डेम सहित अन्य संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।
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उपचारित नालों में अब गर्मी के दिनों में भी पानी रहता है। इससे निस्तार, पेयजल और सिंचाई के लिए जल की उपलब्धता बढ़ी है और क्षेत्र में भू-जल स्तर में भी बढ़ोतरी हो रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर छत्तीसगढ़ में नरवा कार्यक्रम के सुचारू संचालन, नरवा विकास के कार्यों को गति प्रदान करने तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा नरवा विकास के किए जा रहे कार्यों में समन्वय स्थापित करने के लिए वन एवं जलावायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू की अध्यक्षता में सात सदस्यीय नरवा मिशन का गठन किया गया है।
3) यह भी पढ़ें :[typography_font:14pt;" >रायपुर. छत्तीसगढ़ में पानी का संकट न आए और किसानों केा खेती कार्य के लिए आसानी से पानी मिलता रहे, इसके लिए नालों को प्रवाहमान बनाने की योजना है। इसके लिए राज्य में नरवा मिशन गठित किया गया है। इसके माध्यम से छोटे-छोटे भूमिगत डाइक जैसी संरचनाओं की मदद से नालों को निरंतर बहने वाला सदानीरा नाला बनाते हुए नालों के जल द्वारा भूमिगत जल को रिचार्ज करने का लक्ष्य रखा गया है।
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Published on:
22 Jun 2022 07:58 pm
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