
Naturopathy Day 2022 : हवा और धूप से हो रहा बीमारियों का इलाज
Naturopathy Day 2022 : देश में नेशनल नेचुरोपैथी-डे 18 नवंबर को मनाया जाता है। बहुत कम लोगों को ही पता होगा कि प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से भी बीमारियों का इलाज किया जाता है। हालांकि इसकी सुविधा अभी प्रदेश के एकमात्र नेचुरोपैथी अस्पताल में मिल रही है।
प्राकृतिक एवं योग विज्ञान कॉलेज नगपुरा दुर्ग में बिना दवाइयों के हवा, धूप, मिट्टी, पानी व आकाश पर आधारित इलाज किया जाता है। नेचुरोपैथी यानी प्राकृतिक चिकित्सा उपचार के लिए पंच तत्वों आकाश, जल, अग्नि, वायु और पृथ्वी को आधार मानकर इलाज किया जाता है। प्राकृतिक एवं योग विज्ञान कॉलेज नगपुरा की प्रिंसिपल और इंचार्ज डॉ. पूनम दुबे बताती हैं, डॉक्टर से सलाह लेकर इसका घर पर भी इलाज संभव है। प्राकृतिक चिकित्सा से जोड़ों का दर्द, ऑर्थराइटिस, स्पॉन्डलाइटिस, सियाटिका, पाइल्स, कब्ज, गैस, एसिडिटी, पेप्टिक अल्सर, फैटी लीवर, कोलाइटिस, माइग्रेन, मोटापा, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, श्वांस रोग, दमा, ब्रॉनकाइटिस, सीओपीडी व त्वचा संबंधी रोगों का उपचार होता है।
ऐसे होता है उपचार
मड बाथ, मिट्टी की पट्टी, वेट शीट पैक (गीली चादर लपेट), हॉट आर्म एंड फुट बाथ, सन बाथ (सूर्य स्नान), कटि स्नान, स्टीम बाथ, एनीमा, स्पाइन स्प्रे बाथ, मॉर्निंग वॉक, जॉगिंग के अलावा उपवास, दूध कल्प, फलाहार, रसाहार, जलाहार द्वारा भी इलाज किया जाता है। जुकाम, खांसी, उल्टी, दस्त जैसे रोगों में तीन दिन तक तरल पदार्थ व एनीमा द्वारा इलाज घर पर ही किया जा सकता है।
हर साल निकलते हैं सिर्फ 50 नेचुरोपैथीे डॉक्टर
प्रदेश में हर साल सिर्फ 50 नेचुरोपैथी डॉक्टर निकलते हैं। प्राकृतिक एवं योग विज्ञान कॉलेज नगपुरा, प्राइवेट कॉलेज हैं। इसके अलावा प्रदेश में एक भी सरकारी कॉलेज नहीं है। यहां बीएनवाईएस (बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस) की पढ़ाई होती है। इसकी 50 सीट है। चार साल थ्योरी और एक साल का इंटर्रशिप कुल 5 साल की पढ़ाई होती है। कोरोना के बाद से छात्रों की रुचि इस ओर बढ़ी है। नीट के माध्यम से इसका चयन होता है। साथ ही कट ऑफ से छात्र लिए जाते हैं। प्रदेश का एकमात्र कॉलेज पंडित दीनदयाय आयुष यूनिवर्सिटी रायपुर से संबद्ध है।
50 बिस्तर के अस्पताल में 40 भर्ती
डॉ. पूनम दुबे का कहना है, प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लंबी चलने वाली बीमारियों को ठीक करने का प्रयास किया जाता है। प्राकृतिक इलाज से बहुत इफेक्ट पड़ता है। ऑर्थराइटिस, बेक पैन जैसे मरीजों की जल्दी रिकवरी होती है। इस प्रक्रिया से शरीर के अंदर व बाहर दोनों की सफाई होती है और इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है। 50 बिस्तर के अस्पताल में 40 मरीज भर्ती हैं, जिनका इलाज चल रहा है। उनका कहना है, जिन्हें कोई बीमारी भी नहीं है, वह भी इस पद्धति का उपयोग कर सकते हैं।
134 नेचुरोपैथी डॉक्टर पंजीकृत
राज्य होम्योपैथी परिषद छत्तीसगढ़ के रजिस्ट्रार डॉ. संजय शुक्ला ने बताया, प्रदेश में एकमात्र नेचुरोपैथी हॉस्पिटल नगपुरा में चल रहा है। वर्तमान में एक भी सरकारी अस्पताल नहीं हैं। अक्टूबर 2022 तक 134 प्राकृतिक योग चिकित्सक, यूनानी एवं प्राकृतिक चिकित्सा बोर्ड में पंजीकृत है। इसमें से कुछ कॉलेज में और कुछ प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं।
Published on:
17 Nov 2022 09:34 pm

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