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लापरवाही : सफाई व्यवस्था चौपट; निगम ने समाप्त किया टेंडर

- तीन वार्डों में पकड़ी खामी, कार्रवाई सिर्फ एक वार्ड में

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लापरवाही : सफाई व्यवस्था चौपट; निगम ने समाप्त किया टेंडर

लापरवाही : सफाई व्यवस्था चौपट; निगम ने समाप्त किया टेंडर

रायपुर@ शहर की सफाई पर हर महीने करोड़ रुपए खर्च होता है, परंतु न तो नालियां साफ हो रही हैं न मोहल्लों की सड़कें। जमीनी स्तर पर सफाई खास्ताहाल है। इसके पीछे की बड़ी ये कि निगम के अफसर जांच में जब-जब वार्डों के सफाईकर्मियों की संख्या को कम पाया तो ठेकेदार पर केवल जुर्माना की खानापूर्ति की गई। अब राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण सर्वे शुरू होने वाला है तो सफाई ठेका निरस्त करने की सख्ती दिखाई जा रही है। ऐसे में सफाई व्यवस्था चौपट होने का सवाल बना हुआ है।
शहर के हर वार्ड को गंदगी मुक्त रखने के लिए आबादी की संख्या के हिसाब से सफाई का ठेका निगम देता है। यानी किसी वार्ड में 35, किसी-किसी में 40 से 45 कर्मचारियों का दल कार्य करता है। ताकि सफाई व्यवस्था दुरुस्त रहे। शहर के लोगों को धूल मुक्त और स्वच्छ माहौल मिल सके। परंतु मॉनिटरिंग और लचर कार्यप्रणाली के चलते सफाई व्यवस्था का बुरा हाल है। नियमित तौर पर हर महीने जरूर लगभग 4 करोड़ रुपए का बिल सफाई ठेकेदारों का बनता है। बदहाल सफाई के कारण ही सुंदरलाल शर्मा वार्ड 42 का ठेका मजबूर होकर जोन आयुक्त को निरस्त करना पड़ा। जबकि सफाई की खराब तस्वीरें शहर के सभी वार्डों की है।

जहां गड़बड़ी मिली वहां क्या हुई कार्रवाई

बात मार्च महीने के दूसरे सप्ताह की है। निगम आयुक्त मयंक चतुर्वेदी अचानक शहीद वीरनारायण सिंह वार्ड की सफाई देखने पहुंच गए। वहां पाया कि सेप्टिक टैंक का मलबा सहित सड़क और नालियों पर गंदगी है। यह देखकर उन्होंने तुरंत जोन 9 के स्वास्थ्य निरीक्षक और सुपरवाइजर को सस्पेंड करने का फरमान जारी करवाया। ऐसा ही हाल अपर आयुक्त अरविंद शर्मा को मोरेश्वर राव गद्रे वार्ड जोन-6 में नजर आया। इस वार्ड के सफाई का ठेका 40 लोगों को रखकर कराने का है। जबकि जांच में मिले थे केवल 25 सफाई कर्मी। इस पर ठेकेदार से 10 हजार जुर्माना वसूला गया।

जोनों से अब मंगा रहे नाली ढंकने का प्रस्ताव

राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण अब कभी भी शुरू हो सकता है। इसे देखते हुए जोनों से नालियों को ढंकने के लिए प्रस्ताव मंगना शुरू हुआ है। इसके बाद जोनवार टेंडर जारी होगा और वार्ड स्तर पर स्लैब बना-बनाकर नालियों पर लगाने का काम चलेगा। तब तक सर्वे टीम वापस जा चुकी है। इसलिए सफाई रैंकिंग में पलीता लगने वाले सवाल ज्वलंत बने हुए हैं।

नगर निगम, अपर आयुक्त, सुनील चंद्रवंशी ने कहा कि शहर की सफाई रैंकिंग तय करने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण 2023 की टीम आने वाली है। इसे देखते हुए सभी वार्डों में अभियान चलाकर सफाई कराने का निर्देश दिया है। सूखा और गीला कचरा अलग-अलग नहीं देने वालों पर जुर्माने की कार्रवाई फिलहाल टल गई है।