
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इलाज के लिए भटक रहे किडनी के मरीज, नहीं मिल रहे डॉक्टर
रायपुर. दाऊ कल्याण सिंह (डीकेएस) सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल के नेफ्रोलॉजी विभाग में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। प्रतिदिन ओपीडी में 40 50 किडनी के मरीज अपना इलाज करवाने पहुंचते हैं। वहीं हर माह 12 सौ से ज्यादा डायलिसिस होता है। इस समय विभाग में 110 से ज्यादा मरीज भर्ती है। लेकिन ताज्जूब की बात यह है कि विभाग में विगत 3 माह से नेफ्रोलॉजिस्ट नहीं है
प्रबंधन नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी से संबंधित बीमारियों के विशेषज्ञ) की जगह एमडी (मेडिसिन) डॉक्टर से काम चला रहा है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि नेफ्रोलॉजिस्ट की तलाश की जा रही है। वेतनमान कम होने की वजह से कोई डॉक्टर यहां आने को तैयार नहीं है। किडनी और उससे संबंधित बीमारियों का उपचार नेफ्रोलॉजिस्ट करता है। नेफ्रोलॉजिस्ट ही तय करता है कि मरीज का डायलिसिस होगा कि नहीं। डीकेएस के पूर्व अधीक्षक व नेफ्रोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ पुनीत गुप्ता को 21 जनवरी को सरकार ने अधीक्षक पद से हटाते हुए पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में ओएसडी के पद पर नियुक्त कर दिया था। पुनीत गुप्ता ने ओडीएस बनने के बाद से विभाग अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था। पुनीत गुप्ता की जगह डॉ प्रफुल्ल दवे मरीजों को देख रहे हैं, लेकिन उनके पास एमडी मेडिसिन की डिग्री है न कि नेफ्रोलॉजिस्ट की।
डायलिसिस के नाम पर निजी संस्थानों में लूट
निजी अस्पतालों में डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है। सूत्रों के अनुसार निजी अस्पतालों में गंभीर बीमारी का हवाला देकर मरीजों को खुले आम लूटने का खेल जारी है। वर्तमान में एक डायलिसिस के एवज में 5 से 10 हजार रुपए तक मरीजों से वसूल लिया जाता है। साथ ही सप्ताह में एक से अधिक बार डायलिसिस के लिए मजबूर भी करते हैं।
सेंट्रल ड्रग स्टोर का सिस्टम ऑनलाइन
इस अस्पताल में दवा वितरण प्रणाली को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सेंट्रल ड्रग स्टोर का सिस्टम छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड के माध्यम से ऑनलाइन कर दिया गया है। डीकेएस के संचालन भुवनेश यादव के अनुसार इस सिस्टम के लागू होने से स्टोर में उपलब्ध दवाओं दवाओं की मांग प्राप्ति वितरण और विभागों में ट्रांसफर ऑनलाइन किया जाएगा।
वेतन कम होने से डॉक्टर नहीं कर रहे ज्वाइन
नेफ्रोलॉजिस्ट के लिए अस्पताल प्रबंधन अब तक कई डॉक्टरों से बातचीत कर चुका है, लेकिन वेतनमान कम होने की वजह से बात नहीं बन पा रही है। प्रबंधन ने कोलकाता के एक डॉक्टर से संपर्क किया था। उस डॉक्टर का इंटरव्यू भी हुआ, पर वेतनमान कम होने की वजह से उसने ज्वाइन करने से इंकार कर दिया। प्रबंधन कानपुर नागपुर और कई अन्य स्थानों के डॉक्टरों से भी संपर्क किया है लेकिन कहीं से बात नहीं बन पा रही है।
अंबेडकर अस्पताल से भी पहुंचते हैं मरीज
अंबेडकर अस्पताल से नेफ्रोलॉजी समेत सभी सुपर स्पेशलिटी विभाग केस में शिफ्ट हो चुके हैं। किडनी पीडि़त के पहुंचने पर अंबेडकर अस्पताल के डॉक्टर यह तो डीकेएस रिफर कर देते हैं या फिर वहां के डॉक्टर को कॉल करके अस्पताल में बुलाकर पीडि़त का इलाज कराते हैं।
कुछ समय पहले तीन माह का वेतन नहीं मिलने से नाराज डीकेएस सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के हड़ताल भी कर चुके हैं।
डीकेएस सुपर स्पेसिलिटी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉक्टर केके सहारे ने बताया कि कोलकाता में सर्विस दे रहे नेफ्रोलॉजिस्ट से संपर्क किया गया था। इंटरव्यू होने के बाद वेतनमान पर बात नहीं बन पाई। मरीजों को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं हो रही है इलाज जारी है।
एम्स रायपुर के अधीक्षक डॉ अजय दानी ने बताया कि विगत 10 दिन पहले ही नेफ्रोलॉजिस्ट की नियुक्ति की गई है। सोमवार से ओपीडी संचालित हो रही है, इसीलिए अभी मरीजों की संख्या कम है। प्रतिदिन करीब 20 से 25 मरीज पहुंच रहे हैं।
Chhattisgarh से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Follow करें Twitter और Instagram पर ..
CG Lok sabha election Result 2019 से जुड़ी ताज़ातरीन ख़बरों, LIVE अपडेट तथा चुनाव कार्यक्रम के लिए Download करें patrika Hindi News
Published on:
09 Apr 2019 09:18 am
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
