
गिनती की बसों के चलने और भारी भीड़ देखकर यात्रियों ने ऑटो में किया सफर
रायपुर। CG News: प्रदेश में दूसरे चरण के मतदान के चलते यात्री बसों के सड़कों से गायब होते ही ऑटो चालकों ने जमकर चांदी काटी। चुनाव के लिए बसों को अधिग्रहित करते ही ऑटो चालक दूरदराज के ग्रामीण इलाकों से लेकर दूसरे शहर तक सवारियों को लेकर गए। वहीं भीड़ देखकर यात्रियों से जमकर वसूली की। गिनती के बस चलने और भारी भीड़ के चलते यात्रियों ने मजबूरी में ऑटो से सफर किया।
शहर के भीतर फेरा लगाना छोड़कर दुर्ग, भिलाई, भाटापारा, आरंग, अभनपुर, राजिम, कुरूद, भखारा और पाटन तक की सवारियों को बिठाया। इसके चलते शहर में ऑटो की किल्लत देखने को मिली। शहर में गिनती के ऑटो ही चल रहे थे। उसमें भी अधिकांश ईवी ऑटो को मतदान केंद्रों तक बुजुर्ग और दिव्यांग लोगों को पहुंचाने के लिए रखा गया था। बता दें कि दिवाली त्योहार की खुमारी नहीं उतरने के कारण अब तक ऑटो का परिचालन सामान्य नहीं हो पाया है।
शहर के आउटर में ऑटो की भीड़
शहर के सड़कों पर दौड़ने वाले अधिकांश ऑटो आउटर के चौक-चौराहों में खडे़ थे। बाहर जाने वाले यात्रियों की भीड़ देखकर टाटीबंध, भनपुरी, तेलीबांधा, पचपेड़ीनाका चौक में ऑटो की लाइन लगी हुई थी। इसमें से अधिकांश दूरदराज के यात्रियों को लेकर जा रहे थे। बताया जाता है कि पुलिस के चुनाव कार्य में व्यस्त होने के कारण ऑटो चालक बेखौफ होकर सवारियों को बिठा रहे थे।
डेढ़ गुना किराया
यात्रियों की भीड़ देखकर किराया भी यात्री बसों की अपेक्षा डेढ़ गुना तक वसूली कर रहे थे। भिलाई के सुपेला और अभनपुर जाने का किराया 60 से 70 रुपए लिया जा रहा था। जबकि यात्री बस में इसका किराया 50 रुपए है। इसी तरह भखारा के लिए 70 से 80, आरंग का 50 से 60, कुरूद 100 रुपए, राजिम 100 से 120 रुपए, भाठापारा, 120 से 150 और दुर्ग का किराया 100 से 120 रुपए लिया जा रहा था।
सवारी के अनुसार रूट तय
सवारी की संख्या देखकर ऑटो चालक अपने मनमुताबिक रूट पर चल रहे थे। जबकि ऑटो चालकों को परिवहन विभाग द्वारा जिले की सीमा तक परिचालन करने के लिए परमिट जारी किया गया है। लेकिन, मौका देखकर अपने मनमुताबिक ऑटो चला रहे थे। बता दें कि रायपुर आरटीओ में इस समय करीब 11000 ऑटो पंजीकृत है। इसमें करीब 9000 डीजल और पेट्रोल चलित एवं 2000 ईवी ऑटो शामिल है।
मजबूरी में ऑटो की सवारी
यात्री बसों को चुनाव के लिए अधिग्रहित करने के कारण मजबूरी में यात्रियों को ऑटो में सफर करना पड़ा। किसी तरह अपने परिवार के साथ धक्के खाते हुए अपने घर पहुंचे। बताया जाता है कि सबसे अधिक परेशानी रायपुर से दुर्ग के बीच रोजाना सफर करने वालों को हुई। इस मार्ग पर चलने वाली अधिकांश बसों के नहीं होने और लंबी दूरी की लक्जरी बसों में लोकल सवारी को नहीं बिठाने के कारण सड़कों पर भटकते हुए दिखे।
Updated on:
18 Nov 2023 08:49 am
Published on:
18 Nov 2023 08:48 am
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