
रायपुर. छत्तीसगढ़ में ओल्ड पेंशन योजना शुरू होने के साथ ही कर्मचारी और राजनीति जगत में हलचल मच गई है। इस मसले पर कर्मचारियों की मिलीजुली प्रक्रिया सामने आ रही है। अप्रैल 2022 के बाद नियुक्ति होने वाले कर्मचारी फायदें में रहेंगे। वहीं पुराने कर्मचारी अभी हिसाब-किताब में लगे हैं। दूसरी ओर इस मुद्दे पर भाजपा-कांग्रेस भी आमने सामने हो गई है। कुल मिलकर ओल्ड पेंशन योजना को लेकर कहीं खुशी, कहीं गम का माहौल है। हालांकि एक-दो सप्ताह में इसकी तस्वीर पूरी तरह से साफ होगी।
वित्त विभाग के आदेश के बाद कर्मचारियों का एक वर्ग योजना के विरोध में खड़ा दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि यह योजना कर्मचारियों के साथ धोखा है। सहायक शिक्षक फेडरेशन की प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि पुरानी पेंशन बहाली को लेकर जो संशोधित आदेश जारी किया गया है, वो स्वीकार योग्य नहीं है। ये बड़ा अजीबोगरीब निर्देश है, मतलब हम 6 साल पहले 2012 से राशि की कटौती कराएं और हमें राशि का लाभ 2018 से मिले। वहीं छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संजय शर्मा ने स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की है। कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन के संयोजक कमल वर्मा ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर इस माह के अंत तक कोर कमेटी की बैठक बुलाकर सभी सदस्यों से सलाह ली जाएगी।
समाधान की जगह नई समस्या
प्रदेश भाजपा महामंत्री ओपी चौधरी ने राज्य सरकार पर कर्मचारियों को उलझाने की नीतियां अपनाने का आरोप लगाया गया है। ओल्ड पेंशन योजना पर वित्त विभाग के जारी निर्देश ने कर्मचारियों के सामने समाधान की जगह नई समस्या पैदा कर दी है। यह सरकार किसी मुद्दे को सुलझाने में नहीं, उलझाने में भरोसा रखती है। ऐसा एक भी संवेदनशील मुद्दा नहीं है, जिसे इस सरकार की पैंतरेबाजी ने उलझाया न हो। इस पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने कहा,जब भी कर्मचारी की हितों की बात होती है, तब भाजपा उसके विरोध में खड़े हो जाती है। ओल्ड पेंशन स्कीम को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कर्मचारियों का बुढ़ापा सुरक्षित करने के लिए शुरू किया है।
Published on:
27 Jan 2023 06:15 pm
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