
जितेंद्र दहिया/रायपुर. प्र्रदेश के 19 जिलों में नागरिक अपूर्ती निगम द्वारा चना वितरण की योजना संचालित की जा रही है। इस योजना में एक घोटाला सामने आया है। पत्रिका को मिली जानकारी के मुताबिक राजधानी की एक कंपनी को चना वितरण का ठेका दिया गया है। कंपनी द्वारा बांटे जा रहे १ किलो के चना के पैकेट में में सिर्फ २० फीसदी ही चना उपलब्ध है। पैकेट खोलते ही हितग्राहियों को चने की जगह पर तिवरा मिल रहा है। वर्तमान में खुले बाजार में चना की कीमत 40 रुपए है और तिवरा महज २६ रुपए किलो बिक रहा है।
इससे साफ है कि कंपनी प्रति पैकेट १४ रुपए का गोलमाल कर रही है। यदि सभी १९ जिलों के आंकड़ों पर नजर डालो तो साफ है कि जून तक 523042.15 क्विंटल चना के वितरण किया जा चुका है। चालू सत्र में प्रदेश भर में कुल 30 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जिनमें से २३ शिकायतें चना वितरण नहीं होने व 7 शिकायतें गुणवत्ताा खराब होने को लेकर हुई हैं। यह शिकायतें विभाग तक पहुंची हैं। जबकि जमीनी स्तर पर हर हितग्राही गुणवत्ता हीन वितरण से परेशान है। यह है योजना शासन ने 19 जिलों के 75 अनुसूचित विकास खंडों में चना वितरण के लिए 270 करोड़ का बजट तय किया है।
इसमें बीपीए परिवारों को दो पैकेट 1-1 किलो चना महज ५ रुपए में वितरित किया जा रहा है। जबकि नान इसे तकरीबन 48 रुपए प्रति किलो में खरीद रही है। एेसे में न तो हितग्राहियों को गुणवत्ता पूर्ण अनाज मिल रहा है दूसरी ओर शासन को भी करोड़ों की चपत लगाई जा रही है। तिवरा लेथाइरस सेटाइवस (तिवरा) दुष्प्रभाव से लेथारियम होने की बात कही जाती है। तिवरा में मौजूद न्यूरो टॉक्सिन और बीटा-ओडीएपी के चलते उपभोग-उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। बाद में कुछ संस्थाओं ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। इससे कोर्ट ने रिसर्च कर यह पता लगाने के लिए कहा है। दाल के उपभोग को लेकर लेथारिम की आशंका भी जताई जाती रही है। जिससे हाथ-पैर में टेढ़ापन, पैरालिसिस, पैरोसिस, लकवा जैसी स्थिति होती है।
कार्रवाई की जाएगी
इस संबंध में शिकायतें कई जिलों से मिली हैं। जिनमें जांच चल रही है। जांच रिपोर्ट आने पर कंपनी पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
रिचा शर्मा, सचिव, नागारिक आपूर्र्ति विभाग, छग

Updated on:
19 Aug 2017 12:47 pm
Published on:
19 Aug 2017 12:43 pm

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