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ऑनलाइन क्लास बन रहा बच्चों के बीमारी का कारण

- टेंडोनाइटिस, उंगलियों में झुनझुनाहट और कलाई दर्द से जूझ रहे छात्र .- आंखों की रोशनी भी हो रही कम .

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रायपुर. कोरोना संक्रमणकाल में स्कूल शिक्षा विभाग ने शासकीय और निजी स्कूलों के जिम्मेदारों को ऑनलाइन क्लास लगाकर छात्रों का सिलेबस कंप्लीट कराने का निर्देश दिया है। विभागीय अधिकारियों का यह निर्देश पालकों के सिर का दर्द और छात्रों की बीमारियों का कारण बन रहा है। ऑनलाइन क्लास होने की वजह से छात्रों को टेन्डोनाइटिस (कलाई के आस पास मांसपेशियों में सूजन), उंगलियों में झुनझुनाहट, कलाई दर्द, सिर दर्द और आंखों की बीमारियों ने घेर लिया है। छात्र चिडचिड़े भी हो रहे है। इन सब समस्या के बावजूद पालक छात्रों को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए मजबूर है।

हर तीसरे छात्र को ये समस्या
राजधानी के चाइल्ड स्पेशलिस्ट और आंखों के डॉक्टरों के अनुसार लॉकडाउन के बाद हर तीसरे छात्र में ये समस्या देखने को मिल रही है। पालक संपर्क कर रहे है, तो नसों के दर्द को कम करने के लिए सिकाई और आंखों की रोशनी को बढ़ाने के लिए चश्मा पहनाने की सलाह दी जा रही है। डॉक्टरों ने पढ़ाई करते समय जीरो पावर के चश्में आखों में लगाने और मोबाइल हाथ में पकडऩे के बजाए, उसके स्टैंड में रखने की सलाह दी है।

सबसे ज्यादा दिक्कत 5 से 10 वर्ष के छात्रों को
डॉक्टरों ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई होने से सबसे ज्यादा समस्या 5 से 10 वर्ष के छात्र और उनके पालकों को हो रही है। कम उम्र में कंप्यूटर और मोबाइल से निकलने वाली रोशनी को बच्चों की आंखें सम्हाल नहीं पाती, जिस वजह से उन्हें सिर दर्द जैसी समस्या से जूझना पड़ रहा है। ऑनलाइन क्लास लेने वाले बच्चों को रोजाना खुले मैदान में खिलाने और हर तीन घंटे में आंखों को धुलने की सलाह डॉक्टरों ने दी है।

पालकों का ये है कहना
ऑनलाइन क्लास के दौरान बच्चों के आस पास बैठना पड़ता है, ताकि वे पढ़ सके। क्लास के दौरान खुद निजी काम नहीं कर सकते, इस वजह से काम प्रभावित हो रहा है।
दीपा सिंह, पालक

ऑनलाइन क्लास को अल्टरनेट करना चाहिए। इससे बच्चें मोबाइल और कंप्यूटर का कम इस्तेमाल करेंगे और उनका सिलेबस भी पूरा हो जाएगा। विभागीय अधिकारियों को इस बारे में सोचना चाहिए।
नम्रता गुप्ता, पालक

ऑनलाइन क्लास से हमारे बच्चे चिड़चिड़े हो रहे है। डॉक्टरों से सलाह ली, तो उन्होंने इलेक्ट्रानिक गैजेट कम इस्तेमाल करने की सलाह दी है। समस्या होते हुए भी बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर हम ऑनलाइन पढ़ाने के लिए मजबूर हैं।
रितेश होतवानी, पालक

कम उम्र वाले छात्रों का सिलेबस विभाग को कम करना चाहिए। इससे उन पर दबाव नहीं पड़ेगा और वे कम समय में अपना कोर्स पूरा कर सकेंगे।
सन्नी कुमार, पालक

एक्सपर्ट व्यू
लॉकडाउन पीरियड में इलेक्ट्रानिक गैजेट का इस्तेमाल बढ़ा है। इसका दुष्प्रभाव सब पर पड़ रहा है। छोटे बच्चे ज्यादा शिकार इसलिए हो रहे है, क्योंकि उनकी क्षमता कम है। बच्चों को इलेक्ट्रानिक गैजेट का कम इस्तेमाल करने दें। समय-समय पर आंख धुलवाते रहें ताकि आंखों को आराम मिल सके। खाने में सब्जियों और फल का ज्यादा सेवन करना चाहिए।
डॉ दिनेश मिश्रा, नेत्र विशेषज्ञ,रायपुर।