
डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल ऑर्गन रिट्रीवल सेंटर (Ambedkar Hospital Organ Retrieval Center) बनने जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने 26 जनवरी तक इसके लिए तैयारी पूरी करने कहा है। इसके तहत ब्रेनडेड मरीजों के ऑर्गन अस्पताल में ही रीट्रिव यानि निकाल कर डीकेएस हॉस्पिटल (DKS Hospital) में ट्रांसप्लांट के लिए भेजे जाएंगे। राष्ट्रीय स्तर पर ऑर्गन ट्रांसप्लांट प्रोग्राम को बढ़ावा देने के लिए सरकार का यह बड़ा फैसला है। प्रदेश को अब तक दो ब्रेनडेड मरीज मिले हैं। इनका ऑर्गन निकालने से लेकर ट्रांसप्लांट करने की प्रक्रिया एक प्राइवेट अस्पताल में हो चुकी है। सरकार के द्वारा एम्स (AIIMS) के बाद दूसरे सरकारी अस्पताल में ऑर्गन ट्रांसप्लांट (Organ transplant) की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। शुरुआत में डीकेएस हॉस्पिटल में किडनी और स्कीन ट्रांसप्लांट (kidney snd skin transplant) हो सकेंगे। वहीं विशेषज्ञों की टीम के साथ संसाधन मिलने पर हार्ट ट्रांसप्लांट (heart transplant) की सुविधा आंबेडकर अस्पताल के एसीआई में मिल सकेगी।
लखनऊ से ट्रेनिंग लेकर लौटी एम्स की टीम
एम्स में जल्द ही 5 लोगों का किडनी ट्रांसप्लांट किया जाना है। इसके लिए 7 विशेषज्ञों की टीम लखनऊ गई थी। यहां से किडनी ट्रांसप्लांट की ट्रेनिंग लेकर टीम लौट आई है। बीते दिनों आए केंद्र सरकार के महानिदेशक (स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. अतुल गोयल ने भी एम्स का निरीक्षण कर जल्द से जल्द ट्रांसप्लांट शुरू करने पर जोर दिया था। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम को ट्रेनिंग देने के लिए उन्होंने एम्स में ही व्यवस्था कराने की बात भी कही थी। एम्स में भी रिट्रीवल सेंटर खोलने का प्रस्ताव है।
आंबेडकर अस्पताल को ऑर्गन रिट्रीवल सेंटर (Organ Retrieval Center to Ambedkar Hospital) के रूप में विकसित किया जाना है। इसके लिए स्वास्थ्य सचिव ने तैयारी शुरू करने कहा है। अस्पताल में इसे लेकर प्राइमरी लेवल से तैयारी शुरू की जा रही है। इसकी गाइडलाइन से लेकर बेसिक रिक्वायरमेंट के हिसाब से काम किया जा रहा है।
डॉ. एसबीएस नेतामअधीक्षक, आंबेडकर अस्पताल
आंबेडकर अस्पताल लंबे समय से स्टॉफ की कमी से जूझ रहा है। 12 सौ से अधिक बेड वाले इस अस्पताल में एक तिहाई ही स्टॉफ कार्यरत हैं। ऐसे में अब इसे रिट्रीवल सेंटर बनाने की योजना है। ब्रेनडेड मरीज से ऑर्गन निकालने के लिए ट्रिनी विशेषज्ञ डॉक्टर व स्टॉफ की जरूरत पड़ेगी। अभी अस्पताल में ही स्टॉफ कम हैं। अगर ऑर्गन निकालने की प्रक्रिया समझने के लिए इन्हीं में से कुछ लोगों को ट्रेनिंग दी जाती है तो अस्पताल का संचालन प्रभावित हो जाएगा। स्टॉफ की कमी से प्रबंधन भी परेशान है।
Published on:
17 Dec 2022 03:09 pm
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