6 नवंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

धान भुगतान बना राजनीतिक मुद्दा, BJP के बयान पर बघेल बोले- मेहनत की कमाई पर सवाल क्यों?

Chhattisgarh paddy procurement row: मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

रायपुर

•

image

Shradha Jaiswal

•

Updated: 2 Mar 2026, 9:08 AM IST

धान भुगतान बना राजनीतिक मुद्दा, BJP के बयान पर बघेल बोले- मेहनत की कमाई पर सवाल क्यों?(photo-AI)

धान भुगतान बना राजनीतिक मुद्दा, BJP के बयान पर बघेल बोले- मेहनत की कमाई पर सवाल क्यों?(photo-AI)

CG Paddy Procurement: छत्तीसगढ़ में धान की अंतर राशि के एकमुश्त भुगतान को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा के सोशल मीडिया पोस्ट के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। झा ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर धान अंतर की राशि को लेकर बघेल पर तंज कसा और उन्हें योजना का “सबसे बड़ा लाभार्थी” बताया। इस बयान के बाद सियासी तापमान बढ़ गया है।

CG Paddy Procurement: बघेल का पलटवार: “किसानों को मिल रहे पैसे से जलन क्यों?”

पूर्व सीएम बघेल ने एक्स पर जवाब देते हुए लिखा कि किसान मालामाल हुए तो इसलिए क्योंकि उन्होंने मेहनत कर फसल उगाई और बेची। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने खाद और पर्याप्त बिजली उपलब्ध नहीं कराई, फिर भी किसानों ने पसीना बहाकर धान पैदा किया।

बघेल ने कहा कि उनकी सरकार की कोशिश थी कि मेहनतकश किसानों को उनकी उपज का पूरा पैसा मिले और वादा निभाया गया। उन्होंने भाजपा के 15 साल के शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान किसान आत्महत्या कर रहे थे, जबकि उनकी सरकार ने किसानों को सम्मान और हक़ का पैसा दिया।

केंद्र सरकार पर भी सवाल

बघेल ने प्रधानमंत्री के 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के वादे का हवाला देते हुए पूछा कि क्या आय दोगुनी हुई? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि किसानों को मिल रही राशि को भाजपा “माल” क्यों कह रही है। उन्होंने कहा कि यह किसी घोटाले का पैसा नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत की कमाई है और इस पर राजनीति करना गलत है।

सियासी तापमान चढ़ा

धान की अंतर राशि को लेकर शुरू हुआ यह बयानबाजी का दौर अब खुली राजनीतिक जंग में बदलता दिख रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने के संकेत हैं।