
बड़ा खुलासा: गुड़ाखू समेत पान मसाला कंपनियों के दावों की खुली पोल, निकोटिन मिलाकर युवाओं को धकेल रहीं नशे के दलदल में
रायपुर. देशभर की बड़ी-बड़ी पान मसाला कंपनियां अपने उत्पादों में जीरो निकोटिन (रसायन, जो नशे के लिए इस्तेमाल होता है।) का दावा करती हैं। मगर, केंद्र सरकार की नोएडा स्थित नेशनल टोबेको टेस्टिंग लेबोरेट्री की हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक बिकने वाले गुड़ाखू और पान मसाला में निकोटिन पाया गया है। पत्रिका के पास मौजूद इस रिपोर्ट ने यह साबित कर दिया है कि कंपनियां युवाओं को नशे के दलदल में धकेल रही हैं। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने नामी कंपनियों के गुड़ाखू और पान मसाला के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे थे।
इसकी रिपोर्ट 28 अक्टूबर को आई, और 5 नवंबर को स्वास्थ्य संचालक नीरज बंसोड़ ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नियंत्रक को पत्र लिखकर अग्रिम कार्रवाई के लिए कहा, मगर खाद्य विभाग का कहना है कि यह उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता है। अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि कार्रवाई करेगा तो कौन? जबकि यह जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ सबसे अहम विषय है।
उधर, छत्तीसगढ़ में गुड़ाखू की खपत देश में सर्वाधिक है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। यहां बड़े कारोबारी इस कारोबार में हैं। सूत्रों के मुताबिक सरकारें यह मानकर चल रही हैं कि गुड़ाखू में निकोटिन नहीं होता है। मगर, इस खुलासे के बाद नशे के विरुद्ध अभियान छेडऩे वाली कांग्रेस सरकार क्या एक्शन लेगी, यह देखने वाली बात होगी।
राज्य में प्रतिबंधित गुटखा
राज्य सरकार ने 2014 से गुटखा पर प्रतिबंध लगा रखा है। यानी की कंपनियां पान मसाला ही बेच सकती हैं। इस प्रतिबंध के बाद कंपनियों ने तोड़ निकाला और पान मसाला से गुटखा को अलग किया। मगर, दोनों पाऊच साथ में बिक रहे हैं।
क्या कहता है सुप्रीम कोर्ट का आदेश- खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2011 के मुताबिक निकोटिन या तंबाकू को किसी भी खाद्य उत्पादों में मिलना प्रतिबंधित है। पान मसाला में इसे मिलना सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना है।
डॉक्टर बोले, निकोटिन उत्तेजना बढ़ता है, नसें फटने की आशंका होती है- एडवांस कॉर्डियक इंस्टीट्यूट के कॉर्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव का कहना है कि निकोटिन निकोटिन उत्तेजना बढ़ाता है। हार्ट और ब्रेन की नसें सिकुड़ती हैं। ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। नसों में थक्के जमने की संभावना बढ़ जाती है। इसके चलते ब्रेन और हार्ट में नसों के फटने के मामले भी आए हैं। मुंह में निकोटिन से अल्सर और यह आगे चलकर कैंसर बनता है। डॉ. श्रीवास्तव का कहना है कि इसके लगातार इस्तेमाल से व्यक्ति का खुद पर नियंत्रण पूरी तरह से हट जाता है।
स्वास्थ्य विभाग के राज्य तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. कमलेश जैन ने कहा, संचालक द्वारा रिपोर्ट खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नियंत्रक को अग्रिम कार्रवाई के लिए पत्र लिखा है। यह कोटपा एक्ट में नहीं आता है।
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के सहायक आयुक्त राजेश शुक्ला ने कहा, स्वास्थ्य विभाग को जवाब दे दिया गया है। निकोटिन फूड है न ही ड्रग। इस पर कार्रवाई नेशनल टोबेको कंट्रोल प्रोग्राम के तहत ही होनी चाहिए।
Published on:
29 Nov 2021 10:51 am
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