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पत्रिका साक्षात्कार : भाजपा के पास स्थानीय नेता नहीं, इसलिए हैं मोदी के भरोसे

CG Election 2023: छत्तीसगढ़ के गली-मोहल्लों और चौक-चौराहों पर इस बार दीपावली से ज्यादा चुनावी चर्चा हो रही है।

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Patrika Interview: BJP has no local leaders, depends on Modi Raipur

पत्रिका साक्षात्कार : भाजपा के पास स्थानीय नेता नहीं, इसलिए हैं मोदी के भरोसे

रायपुर पत्रिका @ राजेश लाहोटी। CG Election 2023: छत्तीसगढ़ के गली-मोहल्लों और चौक-चौराहों पर इस बार दीपावली से ज्यादा चुनावी चर्चा हो रही है। इन सबके बीच मुख्यमंत्री भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ की सभी विधानसभा सीटों में पहुंचकर कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने में लगे हैं। जब पत्रिका ने उनसे चुनाव से जुड़ी चर्चा की, तो उन्होंने दोबारा सरकार बनाने का दावा करते हुए कहा कि हमने 75 पार का नारा दिया था। हम इसके आस-पास ही रहेंगे। उन्होंने कहा, भाजपा के पास स्थानीय नेता ही नहीं है, इसलिए वे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और दिल्ली के अन्य नेताओं के भरोसे चुनाव लड़ रहे हैं। इस वजह से भाजपा के कार्यकर्ता नेताओं से सीधे कनेक्ट नहीं हो पा रहे हैं।

सवाल: पिछली बार की तरह इस बार कौन सी घोषणा गेम चेंजर साबित होगी?

जवाब: पिछली बार की तरह इस बार भी हम ऋण माफ करेंगे और 3200 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से धान की खरीदी करेंगे। फ्री एजुकेशन और बिजली बिल 200 यूनिट तक फ्री दे रहे हैं। हम किसान ही नहीं महिला स्व-सहायता समूह, महिलाओं और ट्रांसपोर्टरों का भी कर्ज माफ करेंगे। स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल पालकों के लिए बहुत बड़ी चीज है। भाजपा के समय एक भी सरकारी अंग्रेजी स्कूल नहीं थे। हम तो कॉलेज भी खोल रहे हैं। बहुत से पालक अपने बच्चों को इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेज में इसलिए नहीं पढ़ा पाते हैं, क्योंकि उनके पास फीस देने के लिए पैसे नहीं होते हैं। आने वाले समय में एजुकेशन के कारण पूरे प्रदेश में जो परिवर्तन आएगा, वो छत्तीसगढ़ के लिए तो गेम चेंजर ही होगा।

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सवाल: भाजपा के घोषणा पत्र को किस नजर से देखते हैं?

जवाब: भाजपा ने हमारे घोषणा पत्र की नकल की है। उसे भी पूरा नहीं किया है। उनके घोषणा पत्र में ऋण माफी और बिजली बिल में छूट की कोई बात नहीं है। उनके पास कुछ भी नहीं है। जबकि हमने 17 गारंटी पहले ही दे दी थी। भाजपा उसके पीछे-पीछे चलती गई। इसके बाद भी भाजपा ने नकल करते समय अकल भी नहीं लगाई है।

सवाल: इस बार घोषणा पत्र से पहले घोषणाएं करने का कारण क्या था?

जवाब: यह घोषणा नहीं, हमारी गारंटी है। इसे हम करेंगे ही। जनता के बीच जाकर सिर्फ भाषण देने से नहीं होता है। जनता को बताना पड़ेगा कि उन्हें क्या दे रहे हैं। इस काम को हमने किया और भाजपा सिर्फ देखती रह गई। भाजपा नेता तो सिर्फ कोसने का ही काम करते रहे।

सवाल: आपकी घोषणाएं जनता के लिए कैसे महत्वपूर्ण साबित होगी?

जवाब: हमारा मुख्य उद्देश्य लोगों की आय बढ़ाना है। आज महंगाई के कारण सभी की हालत खराब है। आटा, तेल, दाल, गैस सभी महंगे हैं। खेती करना दुभर हो गया है। रेल बंद है। यात्रा भी महंगी हो गई है। ऐसे समय में जनता तो उम्मीद करेगी। हमने तेंदूपत्ता 6 हजार रुपए प्रति मानक बोरा करने का वादा किया है। हर साल बोनस देंगे। यह आय बढ़ाने की बात है। कर्ज माफी, 3200 रुपए धान और प्रति एकड़ 20 क्विंटल की खरीदी से इस बार समर्थन मूल्य में धान खरीदी का आंकड़ा 125 लाख मीटि्रक टन तक जाएगा। भाजपा शासनकाल में तो 55-60 हजार मीटि्रक टन में अटक गए थे। पांच साल में यह आंकड़ा ढाई गुना से ज्यादा हो गया है। इसे लोग महसूस कर रहे हैं। धान ज्यादा खरीदेंगे, तो किसानों को पैसा ज्यादा मिलेगा। हम 2500 का वादा किए थे और 2640 दिए। वादे से बढ़कर दिया है, इसलिए कांग्रेस पर भरोसा है। भाजपा ने 2100 रुपए प्रति क्विंटल और बोनस देने की बात कहीं थी, लेकिन नहीं दिए। बोनस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ही अड़ंगा लगाया था। इस लिए रमन सिंह ने नहीं दिया।

सवाल: चुनाव में कांग्रेस के खाते में कितनी सीटें आएंगी?

जवाब: भाजपा और रमन सिंह पहले चरण के चुनाव में जीत का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन उनकी खुद की सीट का बुरा हाल है। भाजपा के अन्य बड़े नेताओं को भी जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है। पहले चरण के चुनाव में भी हमारी िस्थति मजबूत है। हमने इस बार 75 पार का नारा दिया है। इस चुनाव में हम इसके आस-पास ही रहेंगे।

सवाल: इस बार के चुनाव में भी जोगी फैक्टर काम करेगा?

जवाब: अमित जोगी अपने राजनीतिक जीवन के सबसे अच्छे दौर से गुजर रहे हैं। उन्हें जेड प्लस सुरक्षा मिली हुई है। हेलीकॉप्टर में घूम रहे हैं। वो पाटन से चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उनके साथ ज्यादा लोग ही नहीं है। जो थोड़े बहुत लोग है, वो दूसरी पार्टी में वोट देने के लिए कह रहे हैं। चुनाव आते-आते तक उनके प्रत्याशी पहले ही हार मान ले रहे हैं। हमें भी पता है कि जोगी को चुनाव की फंडिंग कहां से हो रही है।

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