
रायपुर . पत्थलगड़ी विवाद की जांच कर राजधानी लौटे गुंडरदेही विधायक आरके राय ने कहा कि जशपुर जिले के गांवों में बनी पत्थलगड़ी में कुछ भी असंवैधानिक नहीं लिखा है। उन पत्थरों पर जो भी लिखा गया है, उसका उल्लेख संविधान में है। उसकी इबारत कहीं भी संविधान का अवमान नहीं करतीं।
आरके राय का कहना था, यह एक सामाजिक आंदोलन है, जिसको किसी धार्मिक-राजनीतिक संस्था का समर्थन नहीं है। आरके राय का आरोप था कि जशपुर के जूदेव राजपरिवार ने अपनी साख बचाने के लिए इसे मिशनरीज का आंदोलन बताकर प्रचारित किया।
आरके राय समिति ने इस रिपोर्ट में शांतिभंग के लिए बाहरी लोगों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना था, सद्भावना यात्रा के साथ गए लोगों ने कलिया बुटुंगा गांव में पत्थलगड़ी तोड़ी। उत्पाती भीड़ जय श्रीराम और जय जूदेव के नारे लगा रही थी।
राय समिति ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को बंधक बनाने के दावे को भी झूठ बताया। उनका कहना है, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी पत्थलगड़ी तोडऩे से उत्तेजित ग्रामीणों को समझाने रुक गए थे, उन्हें ग्रामीणों ने जबरन नहीं रोका था।
इधर, कांग्रेस की ओर से गठित अमरजीत भगत जांच समिति ने पत्थलगड़ी विवाद को धार्मिक रंग देने को आदिवासी वोटों के धु्रवीकरण के लिए भाजपा की कोशिशों का नतीजा बताया है। प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया और अध्यक्ष भूपेश बघेल को सौंपे रिपोर्ट में भगत ने कहा है, पत्थलगड़ी, आदिवासी समाज में लंबे समय से व्याप्त असंतोष की परिणति है। इसमें कहीं भी संविधान का उल्लंघन होता हुआ नहीं दिखता। समिति ने कहा,पहले तो भाजपा नेता और अनुसूचित जनजाति आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष नंदकुमार साय पत्थरलगड़ी की पूजा में शामिल हुए लेकिन बाद में भाजपा के नेताओं ने ही कथित सद्भावना यात्रा निकाली जिससे तनाव पैदा हुआ।
पत्थलगड़ी में तो कलक्टर तक को निमंत्रण था : समिति ने पाया है, जनजातीय समाज ने बाकायदा ग्रामसभा में पत्थलगड़ी का निर्णय लिया। इस निर्णय में सभी जाति-धर्म के लोग शामिल थे। सामुहिक चंदे से उसका निर्माण हुआ। कलक्टर, एसपी सहित सभी वरिष्ठ अफसरों को इसकी सूचना देकर उन्हें कार्यक्रम में आमंत्रित भी किया गया था। गांव वालों ने किसी को गांव में आने से भी नहीं रोका, जैसा की प्रचार किया जा रहा है।
Published on:
09 May 2018 09:17 am
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