
बाजारों में सज गए मिट्टी के बैल, कल किसान धूमधाम से मनाएंगे पोला
गरियाबंद. किसानों का त्यौहार पोला 30 अगस्त शुक्रवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। इस दिन बैलों की पूजा की जाती है। इस त्यौहार पर आकर्षण का केंद्र बच्चों द्वारा खेले जाने वाले मिट्टी के बैल और लड़कियों के लिए मिट्टी के बने रसोई के सेट होते हैं।
पोला के पर्व पर कई जगहों पर बैल दौड़ की प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है। जिसमें लोग बढ़ चढकऱ हिस्सा लेते हैं। कृषि प्रधान प्रदेश छत्तीसगढ़ में भाद्रप्रद कृष्ण पक्ष अमावस्या को पोला का त्यौहार मनाया जाता है। इस दिन पर विशेष तौर से भगवान शिव की सवारी बैलों की पूजा करने की परंपरा है।
पोला त्यौहार के साथ ही छत्तीसगढ़ में हरितालिका तीज की रौनक शुरू हो जाती है। इस दिन के बाद से बेटियों के मायके आने का दौर शुरू हो जाता है। पोला का त्यौहार किसानों के बीच बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन पूजा के लिए विशेष तौर पर घरों में ठेठरी-खूरमी और चिला जैसे छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं।
पोला त्यौहार पर मिट्टी के बैल और खिलौने लोगों के आकर्षण का केंद्र होते हैं। इसलिए शहर की प्रमुख बाजारों में और सडक़ों के किनारे मिट्टी के बैल और खिलौनों की दुकानें सज चुकी है।
पंडित दिलीप मिश्रा तथा पं रामनरायण मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष पोला अमावस्या 30 अगस्त शुक्रवार को मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पर्व को कुशोत्पाटनी अमावस्या भी कहा जाता है। क्योंकि इस पर्व में पुरोहित गण वर्षभर कर्मकांड आदि कार्य के लिए नदी घाटियों से कुशा नामक घास लाते हैं। जिसे साल भर पूजन इत्यादि कार्य में लगाते हैं।
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Updated on:
29 Aug 2019 03:23 pm
Published on:
29 Aug 2019 03:17 pm
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