
हिन्दुस्तान क्वॉइल्स फैक्ट्री से 1800 टन पटरियां जब्त, वाटर टैंक में छुपाकर रखी गई थीं चोरी की रेल पटरियां
रायपुर . रेल की पटरियां चोरी करने वाले गिरोह से पूछताछ में आरपीएफ को चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं। आरपीएफ ने दूसरे दिन भी सिलतरा स्थित हिंदुस्तान क्वॉइल्स लिमिटेड में जांच-पड़ताल की। इस दौरान भारी संख्या में रेल की पटरियां वाटर टैंक और फर्नेस स्पंज की गिट्टियों के भीतर से बरामद की गई। फैक्ट्री से 1800 टन रेल की पटरियां जब्त की गई हैं। ये पटरियां बालाघाट से करीब 9 किमी पटरी चुराकर फैक्ट्री में रखी गई थीं। जब्त पटरियों की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई सामने नहीं आया है। वहीं फैक्ट्री के एक पार्टनर प्रदीप गोयल फरार है। मामले की जांच के लिए मुंबई से विजिलेंस की टीम भी आने वाली है।
छिंदवाड़ा रेल सुरक्षा बल के निरीक्षक मीतेश कुमार सिंह ने कंपनी के डायरेक्टर व मानव संसाधन प्रबंधक पीके दास के नाम से नोटिस जारी कर एक दिन के भीतर फिर जवाब मांगा है। तब तक के लिए वाटर टैंक और अन्य स्थानों में छिपाई गई रेल की पटरियों को आरपीएफ के तीन सिपाहियों की निगरानी में रखा गया है। आरपीएफ ने 30 रेल की पटरियों में नोटिस चस्पा कर सील किया है। जबकि यहां पर 300 से ज्यादा रेल पटरियां बरामद की गई हैं। कंपनी में अरविंद अग्रवाल सहित सात डायरेक्टर हिन्दुस्तान क्वाइल्स लिमिटेड कंपनी में नरेन्द्र शर्मा, दयानंद गोयल, अंकित गोयल, हनुमान धूत, अरविंद अग्रवाल, प्रदीप दयाकिशन गोयल तथा गणेश तायल डायरेक्टर हैं।
रायपुर से हुई गिरफ्तारी
आरपीएफ का कहना है कि मराठा गिरोह के आरोपी माल बेचने रायपुर पहुंचे थे। छिंदवाड़ा आरपीएफ को 26 जनवरी को टीम को इसका इनपुट मिला इसके बाद बिलासपुर आरपीएफ टास्क फोर्स की मदद से चार आरोपियों को हिरासत में लिया गया। जिसमें विनोद राज चौहान उर्फ विनोद मराठा समेत 4 को गिरफ्तार कर लिया गया है।
प्रबंधन को थमाया नोटिस
आरपीएफ की स्पेशल टीम ने सबसे पहले 28 जनवरी को नोटिस जारी कर पटरियों के संबंध में दस्तावेज की मांग की थी। गुरुवार को टीम ने पहुंच कर कंपनी के स्टोर कीपर, एकाउंटेंट और प्रबंधक से पूछताछ की। कोई भी कर्मचारी दस्तावेज प्रस्तुत करने में नाकाम रहा। छिंदवाड़ा रेल सुरक्षा बल के निरीक्षक मीतेश कुमार सिंह का कहना है कंपनी के जिम्मेदार फरार हो चुके हैं।
मैनपुर में मामला दर्ज
24 जनवरी को आरपीएफ पोस्ट मैनपुर में पटरियां चोरी होने की शिकायत दर्ज की गई थी। मराठा गिरोह ने तकरीबन आठ ट्रिप में 22 दिनों के भीतर भारी मात्रा में रेलपांत चुराकर बालाघाट के रास्ते रायपुर के सिलतरा पहुंचाया था। आरपीएफ की टीम में बिलासपुर, बालाघाट और छिंदवाड़ा के अधिकारी शामिल किए गए हैं।
तीन टुकड़े करके पटरियों की हुई तस्करी
आरपीएफ के सूत्रों के मुताबिक समनापुर से लामता के बीच रेलवे ट्रेक पर पटरी बिछाने का कार्य जारी है। ट्रैक पर बिछाई जाने वाली पटरी एक-दो या उससे अधिक व्यक्ति उठाकर ले जा सके ये संभव नहीं है। पूछताछ में चोरों ने बताया कि पटरी को गैस कटर से काटकर तीन टुकड़े किए गए थे। कटिंग के दौरान गिरोह के सदस्य स्थानीय लोगों को खुद को रेलवे का कर्मचारी बताते थे। पटरियों को जेसीबी मशीन के माध्यम से लोड़ की गई थी। छिंदवाड़ा आरपीएफ ने जेसीबी को जब्त कर लिया है।
4 अन्य फैक्ट्रियों के मिले इनपुट
हिंदुस्तान क्वाइल्स और इस्पात इंडिया के अलावा चार अन्य फैक्ट्रियों में भी चोरी के माल खपाने की जानकारी गिरोह के सदस्यों ने दी है। चरोदा स्थित आरपीएफ पोस्ट में चोरों से पूछताछ टास्क फोर्स की टीम द्वारा किया जा रही है। चोरी की रेल पटरियां तलाशने के लिए आरपीएफ की टीम अलग-अलग फैक्ट्रियों में छापामार कार्रवाई कर रही है। अभी तक आरपीएफ को 400 से ज्यादा पटरियां नहीं मिली हैं।
4 करोड़ से अधिक की चोरी
वर्तमान समय में बालाघाट से समनापुर, लामता से नैनपुर और नैनपुर से जबलपुर के बीच ब्रॉडगेज व समनापुर से लामता के बीच का निर्माण कार्य रेलवे प्रबंधन द्वारा किया जा रहा है। समनापुर से लामता के बीच ट्रैक पर बिछाने के लिए रेल पटरी लाई गई थी। जिनमें से 700 से अधिक रेल पटरी करीब 4 करोड़ से अधिक पटरियां मराठा गिरोह द्वारा पार की गई थी।
मराठा गिरोह के सदस्यों ने मैनपुर की पटरियां चुराकर उनको कई स्थानों में बेचा है। आरोपियों के खिलाफ जांच करते हुए रायपुर की दो फैक्ट्रियों में कार्रवाई की गई है। केस से जुड़े लोगों की जांच की जा रही है।
साकेत रंजन, सीपीआरओ, बिलासपुर रेलवे जोन
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Published on:
31 Jan 2020 04:03 pm
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