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रविभवन के मालिकों को गिरफ्तार करने बिलासपुर जाएगी पुलिस

धोखाधड़ी के अलावा चेक बाउंस के हैं आधा दर्जन मामले

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crime news in chhattisgarh

रायपुर . रविभवन के मालिकों के खिलाफ धोखाधड़ी और चेक बाउंस के आधा दर्जन से अधिक मामले हैं। रायपुर आते ही उनके इन सभी मामलों में एफआईआर और गिरफ्तारी होगी। चेक बाउंस के मामलों में अलग-अलग कोर्ट से स्थायी गिरफ्तारी वारंट भी जारी है।

पुलिस ने तेलीबांधा में रूपेश सराफ की ओर से दर्ज कराए गए धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है। फिलहाल बिलासपुर पुलिस ने धोखाधड़ी के मामले में विमलचंद जैन, वैभव जैन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। रायपुर में विमल और वैभव के अलावा वरूण जैन और वर्षा जैन के खिलाफ धोखाधड़ी का अपराध कायम है। लगातार शासकीय अवकाश पडऩे की वजह से रायपुर पुलिस उसे अपने कब्जे में नहीं ले पाई है।

आरोपियों ने मैग्नेटो मॉल के पीछे ताज विला टाउनशिप बनाने के नाम से करोड़ों रुपए लोन लिया था। इसमें स्वतंत्र बंगला बनाकर देना था। इस दौरान कई लोगों से बंगला बुक कराने के नाम पर एक से डेढ़ करोड़ रुपए लिए गए हैं। टाउनशिप नहीं बन पाई है। इससे कई लोग परेशान हैं। इनमें से एक रूपेश सराफ ने तेलीबांधा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोपियों के रायपुर आने के बाद कई और पीडि़तों द्वारा थाने में एफआइआर कराने की तैयारी है। कुछ लोगों ने शिकायत थाने में दे दी है।

होटल ताज में नुकसान होने के दौरान वहां काम करने वाले कई कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया गया। वेतन के एवज में चेक दिया गया, जो बाउंस हो गया। करीब 12 लाख रुपए के चेक बाउंस के मामले हैं। सतना और कोलकाता से भी लेन-देन के मामले में स्थायी गिरफ्तारी वारंट है। सतना से दो साल से गिरफ्तारी वारंट जारी है। इसके बावजूद गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

विमलचंद जैन और उसके परिवार के खिलाफ कार्रवाई नहीं से लोग इतने परेशान हो गए थे कि उनको सार्वजनिक रूप से बदनाम करना शुरू कर दिया है। रायपुर के जयस्तंभ चौक में उनके खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर लगाया गया था। इससे बवाल मच गया था। दोनों पक्षों में जमकर विवाद हुआ। मामला थाने तक पहुंच गया था।

विमल और उसका परिवार इतना शातिर है कि रविभवन के एक-एक इंच जमीन को भी बेच दिया। पहली और दूसरी मंजिल में दुकानों के सामने पैसेज छोड़े गए थे। इससे लोगों का आना-जाना होता था। इस जमीन को भी संबंधित दुकानदारों को बेच दिया गया था। इस स्थान के एवज में लाखों रुपए लिए गए, लेकिन लिखित में कुछ नहीं किया गया। पिछले दिनों आग लगने के बाद इसका खुलासा हुआ। लिखित में कुछ नहीं होने के कारण मामला नहीं बना।