
Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana: एक साल में बीमा लेने से पीछे हटे दो लाख से ज्यादा किसान
Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana: रायपुर. छत्तीसगढ़ में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों की रुचि लगातार कम हो रही है। जबकि इस योजना में किसानों के साथ-साथ राज्य और केंद्र सरकार पर अपनी अंशदान देती है। कांग्रेस से जुड़े किसान नेता भेदभाव का आरोप लगा रहे हैं, तो भाजपा के किसान नेताओं का कहना है कि राज्य की लापरवाही की वजह से प्रदेश के किसानों को संकट के समय भी फायदा नहीं मिल रहा है।
प्रदेश में 2016-17 से प्रधानमंत्री फसल योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) लागू की गई है। यह रबी और खरीफ दोनों फसलों के लिए अलग-अलग होती है। प्रदेश के किसानों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेना अनिवार्य नहीं है। वर्ष 2019-20 में 18.52 लाख किसानों ने योजना के तहत पंजीयन कराया था। वहीं 2020-21 में मात्र 16.36 लाख किसानों ने बीमा के लिए अपना पंजीयन कराया है। एक वर्ष में ही 2 लाख 16 हजार किसान इस योजना का लाभ लेने से पीछे हट गए।
इस स्थिति में मिलता है योजना का लाभ
योजना के तहत बीमित फसलों का प्रतिकूल मौसम जैसे सूखा, बाढ़, कीट व्याधि, ओलावृष्टि आदि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की स्थिति में कृषकों को बीमा दावा राशि का भुगतान किया जाता है। इस योजना का लाभ लेना और नहीं लेना पूरी तरह से किसानों पर निर्भर करता है।
बीमा राशि अधिक मुआवजा कम
बताया जाता है कि इस योजना में किसानों, राज्य और केंद्र सरकार से जितनी राशि भुगतान की जाती है, उसकी तुलना में मुआवजा कम मिलता है। 2020-21 में पंजीकृत किसानों में से 6.36 लाख पात्र किसानों को 850.23 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। जबकि वर्ष 2019-20 में पंजीकृत में से 6.58 लाख किसानों को 1264.34 करोड़ का भुगतान किया गया था।
तय मानकों की वजह से नुकसान
किसान नेता राजकुमार गुप्त बताते हैं कि बीमा के लिए जो मानक तय किए हैं, उससे किसानों को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक एकड़ में धान की फसल करीब 20 क्विंटल होती है, लेकिन बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) में इसका मानक कम रखा गया है। इस वजह से बारिश या अन्य कारणों से फसल खराब होती है, तो भी किसानों की पैदावार तय मानक के आसपास हो जाती है। इससे किसानों को तो नुकसान होता है, लेकिन उसकी भरपाई नहीं हो पाती। बीमा योजना में प्रति एकड़ कम से कम 18 क्विंटल उत्पादन का मानक रखना चाहिए।
यह है कांग्रेस का तर्क
कांग्रेस किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष राम विलास साहू का कहना है कि केंद्र सरकार बीमा राशि देने में भी भेदभाव करती है। इसमें बीमा की राशि तो लेती है, लेकिन जब भुगतान की बात आती है, कई तरह के दावं-पेंच बताकर भुगतान रोक दिया जाता है। जबकि आनावरी रिपोर्ट के आधार पर तत्काल भुगतान होना चाहिए।
यह है भाजपा का तर्क
भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष पूनम चंद्राकर ने कहा कि इसमें किसानों की जागरूकता जरूरी है। जो किसान जागरूक है, उनको लाभ मिलता है। यह बात सही है कि प्रदेश में जिस आधार पर रकबा बढ़ा है, उस आधार पर किसान बीमा का लाभ नहीं ले रहे हैं। यह किसानों के फायदें कि योजना है, लेकिन राजनीति की वजह से राज्य सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है।
Published on:
10 Dec 2021 12:52 pm

