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बीज निगम में नियम विरुद्ध 10 करोड़ रुपए की खरीदी, पोल खुली तो आरोपियों को बचाने में जुटे अधिकारी

नियम नहीं होने के बावजूद कर दिया रेट कांट्रेक्ट, विधानसभा में गूंजा मामला, जांच के आदेश

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बीज निगम में नियम विरुद्ध 10 करोड़ रुपए की खरीदी, पोल खुली तो आरोपियों को बचाने में जुटे अधिकारी

बीज निगम में नियम विरुद्ध 10 करोड़ रुपए की खरीदी, पोल खुली तो आरोपियों को बचाने में जुटे अधिकारी

रायपुर. बीज निगम में नियम नहीं होने के बावजूद रेट कांट्रैक्ट (आरसी) कर दस करोड़ की ह्यूमिक एसिड, सीवीड जेल आदि की 10 करोड़ की खरीदी का मामला सामने आया है। विधानसभा में मामले की गूंज होने और मंत्री ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं, इधर कार्रवाई से बचने के लिए संलिप्त अधिकारियों को बचाने में पूरी टीम जुट गई हैं।जानकारी के अनुसार बीज निगम के अधिकारियों ने वर्ष 2015 से 2018 तक ह्यूमिक एसिड ,सीवीड जेल और एक्सट्रेक्ट खरीदी की, जिसमें उक्त समाग्रियों का नियम विरुद्ध रेट कॉट्रेक्ट कर लिया था। पत्रिका को पास उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि ह्यूमिक एसिड और सीवीड जेल और एक्सट्रेक्ट की अनुशंसा कृषि विश्वविद्यालय रायपुर, राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान परिषद दिल्ली और कृषि विज्ञान केंद्र में से किसी ने भी नहीं की थी। फिर भी तकनीकी आधार की आड़ लेकर आरोपी अधिकारियों को कार्रवाई से बचा लिया गया।

यह है नियमनियम यह है कि बीज निगम उसी सामग्री का रेट कांट्रैक्ट करेगा, जिसकी मांग कृषि या उद्यानिकी विभाग द्वारा की जाएगी। दस करोड़ की इस खरीदी में दोनों संस्थाओं ने मांग नहह्वीं की थी, फिर बीज निगम ने किसकी अनुशंसा पर ह्यूमिक एसिड और सीवीड जेल का दर अनुबंध किया। चौंकाने वाली बात यह है कि बीज निगम की गलत अनुशंसा पर 10 करोड़ से ज्यादा खरीदी हुई लेकिन जिम्मेदारों पर जांच व कार्रवाई की चर्चा तक नहीं हुई। पत्रिका ने अपने 10 फरवरी के अंक में अधिकारियों को बचाने के खेल का खुलासा करने के बाद विधान सभा में कृषि मंत्री ने मामले से जुड़े अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।


आरोपियों को बचाने भेजी गलत जानकारी

सीवीड जेल, एक्सट्रैक्ट और ह्यूमिक एसिड की खरीदी कृषि और उद्यानिकी विभाग ने की थी। कृषि और उद्यानिकी विभाग की किसी भी योजना में इन सामग्रियों को देने का प्रावधान नहीं था फिर भी बीज निगम से दर अनुमोदन का हवाला देकर अधिकारियों ने खरीदी जारी रखी। कृषि और उद्यानिकी विभाग के कुछ अधिकारी तो हदें पार कर बीज निगम के अतिरिक्त अन्य संस्थाओं से भंडार क्रय नियम का उलंघन करते हुए क्रय करने लगे। वर्ष 2018 में मामला प्रकाश में आने पर विधायक सत्यनारायण शर्मा ने मामला विधान सभा मे उठाया गया था। मामला उजागर होने पर दोषी अधिकारियों को बचाने की नीयत से कृषि विभाग ने जांच की ना केवल खानापूर्ति की गई बल्कि विधानसभा में भी गलत उत्तर भेज दिया था।

10 अधिकारियों पर कार्रवाई, 29 के खिलाफ जांच
बीते सप्ताह विधान सभा में ध्यानाकर्षण सूचना के जवाब में कृषि मंत्री ने माना की कृषि विभाग के 29 अधिकारियों पर कार्यवाही तय है। गंभीर अनियमितता वाले 10 अधिकारियों जिन्होंने बीज निगम के अतिरिक्त मार्कफेड से असम्बद्ध संस्थाओं से क्रय किया है, उन्हें निलंबित किया जाएगा। बाकी आरोपियों पर नियमानुसार कार्यवाही जारी रहेगी। साथ ही मामले में एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।


जिम्मेदारों को बचाने का प्रयास
बीज निगम में दर अनुबंध होने को आधार बनाकर सरकारी अधिकारियों को अभयदान दिया जा रहा है। मामले को विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने विधानसभा में उठाया था। बीज निगम के दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच नहीं की जा रही है।

विधानसभा में मुद्दा सामने आया था। मामले की जांच कराई जाएगी। आखिर कैसे आरसी करा ली गई है।
रविंद्र चौबे, मंत्री, कृषि विभाग