
एक फीसदी छूट के बाद भी यहां घट रही महिलाओं के नाम पर प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री
रायपुर. राज्य सरकार द्वारा एक फीसदी छूट देने के बाद भी महिलाओं के नाम पर होने वाली जमीन की रजिस्ट्री में लगातार कमी आ रही है। पांच साल पहले के मुकाबले अब राज्यभर में महिलाओं के नाम पर जमीन और मकानों की रजिस्ट्री की संख्या घटकर आधी हो गई है। रजिस्ट्री दफ्तर के अनुसार 2018-19 में अब तक 7,537 रजिस्ट्रियां हुई।
2015-16 में 4,900, 2016-17 में 5,215 और 2017-18 में 7,816 रजिस्ट्री के दस्तावेज जमा हुए हैं। इनसे 40 करोड़ रुपए की आय हुई है। इस साल 379 रजिस्ट्री कम होने के साथ ही राजस्व में भी कमी आई है। राज्य सरकार ने रायपुर जिले को 650 करोड़ रुपए का टारगेट दिया था। महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री के बाद बैंक लोन और इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने में होने वाली परेशानी के कारण ऐसा होना बताया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में महिलाओं के नाम पर खेती भूमि और खुले प्लॉट की रजिस्ट्री की जाती है तो 5.20 प्रतिशत रजिस्ट्री शुल्क के रूप में देने पड़ते हैं। यही रजिस्ट्री पुरुषों के नाम पर होने पर उन्हें 6.25 फीसदी शुल्क देना होगा। इसमें मुद्रांक शुल्क 5.25 फीसदी और निगम सीमा कर एक प्रतिशत शामिल है। यानी कलक्टर गाइडलाइन से जमीन की कुल कीमत का 6.25 प्रतिशत शुल्क के रूप में जमा कराना होता है।
आंकड़े बढ़े लेकिन घटता गया अनुपात
वर्ष रजिस्ट्रियां
2015-16 4900
2016-17 5215
2017-18 7816
2018-19 7537 अब तक
रायपुर में भी हर साल संख्या कम
राजधानी में भी महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री की संख्या हर साल कम हो रही है। जिले में औसतन हर साल 40 हजार रजिस्ट्री होती हंै। इनमें महिलाओं के नाम पर रजिस्ट्री की संख्या लगातार कम हो रही है। पांच साल पहले तक महिलाओं के नाम पर 50 फीसदी तक रजिस्ट्री होती थी, लेकिन अब यह घटकर 20 से 25 फीसदी रह गई है।
इस साल बूम की उम्मीद
महिलाओं के नाम से भले ही हर साल कम रजिस्ट्री हो रही है, लेकिन कुल रजिस्ट्री की संख्या कांग्रेस सरकार से मिली छूट के बाद बढ़ी है। रायपुर जिले के लिए रजिस्ट्री टारगेट 650 करोड़ से बढकऱ 700 करोड़ रुपए होने की संभावना है। इस साल राजधानी में जमीन का गाइडलाइन रेट बढऩे की उम्मीद कम है, इसलिए माना जा रहा है कि रियल एस्टेट में बूम रहेगा।
उबरने लगा रियल एस्टेट
रायपुर में पिछले साल अप्रैल से इस साल मार्च तक प्रॉपर्टी की कुल 25,524 रजिस्ट्री हुई है। इनमें केवल 7,537 ही महिलाओं के नाम पर हैं। जानकारों के अनुसार हाउसवाइफ के नाम से रजिस्ट्री करने पर चेक पेमेंट की वजह से बैंकों से बड़े ट्रांजेक्शन की जानकारी आयकर विभाग तक पहुंच रही है। आयकर विभाग तुरंत ही संबंधित महिला से पूछताछ करने लगता है कि इतने कैपिटल का सोर्स क्या है?
रायपुर के मुख्य पंजीयक बी.एस. नायक ने बताया कि मार्च माह में रजिस्ट्री की संख्या बढ़ती है। टारगेट के करीब पहुंचने की उम्मीद है।
Published on:
08 Mar 2019 10:58 am
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