
कोनो रूप म आ सकत हे भगवान ह
जांजगीर-चांपा जिला के गांव पिहरीद के बोरवेल के गड्ढा म दस बछर के लइका राहुल साहू ल 105 घंटा रेसक्यू चला के बचा ले गिस। राहुल के दाई गीता साहू ह मुख्यमंतरी भूपेस बघेल ल किहिस ‘तहीं हमर भगवान अस।’
सेना के जानकार अधिकारी, जिला साहेब अउ सब बिसेस गियान रखइयामन के दल ह सरलग काम करिस। अतेक बड़ काम तभे सफल होथे, जब मुखिया ह संकलप लेथे के चाहे जइसे भी हो संकट से उबारना हे। ऐहा मुख्यमंतरी भूपेस बघेल के बड़े सफलता अउ सेवा के कारज ए। कतकोन किसम के काम-काज सरकार के चलथे। वोकर बर बड़ई घलो करे जाथे, फेर ए जउन राहुल साहू ल बचा के इतिहास बना ले गिस, वोहा देस अउ दुनिया ल जगजग ले दिखिस। इही ह असल बिकास के मूलमंत्र ए।
‘दुब्बर बड़ दू असाड़’ कहावत के सुरता सब ल अइस, जब सब जानिन के राहुल साहू ह न बोल सकय, न सुन सकय। सधारन गड्ढा म गिर जतिस तभो राहुल ह गोहराय-चिचयाय नइ सकतिस। जउन ह गोहराथे तेकर कोनो न कोनो सुन लेथे, नइ गोहराय सकय तेकर ल सुने बर भूपेस बघेल जइसन कान वाला मनखे चाही। छत्तीसगढ़ म काया खंडी गीत गाए जाथे। ‘जाए के बेरा संगी काला गोहराबे।’ ऐकर जतका बड़ई करे जाय कमती हे कि पूरा ताकत लगा के सरकार के मुखिया अउ अधिकारीमन एक नवा चलन छत्तीसगढ़ म चलइन। जुर-मिल के जान ल बचइन।
जांजगीर के जवनहा छत्तीसगढिय़ा जिला साहेब जितेन्द्र सुक्ला के अघुवई म एस.पी. विजय अग्रवाल संग चारझन आई.ए.एस. अधिकारी, दूझन डिप्टी कलेक्टर, एकझन एडीसननल एस.पी., पांचझन तहसीलदार, चार डी.एस.पी., आठ इंस्पेक्टर, समेत रायगढ़, दुरूग, बिलासपुर के बचाव दल लगे रिहिस। 120 झन जवान, 32 ए.डी.आर.एफ,, 15 एस.डी.आर.एफ अउ सेना के जवान लगे रिहिस।
सबोझन दिन-रात एक कर दिन। लगभग 500 अधिकारी-करमचारी के फौज मौजूद रिहिस। जनसंपरक बिभाग ह लोगन ल छिन-छिन के सूचना देवत रिहिस। छत्तीसगढ़ ह सांस रोक के बचाव के खबर ल सुनत-गुनत दिन बितइस। भूपेस बघेल ल अचानक दिल्ली जाय बर पर गे। उहां ले आतेसाठ राहुल ल देखे बर अपोलो अस्पताल गिस। तब राहुल के महतारी ह रोवत किहिस - तहीं हमर भगवान अस। ऐहा बडक़ा आसीरवाद ए।
भूपेस बघेल ह लइका के पढ़ई के खरचा सरकार ह दिही कहिके हिम्मत दिस। कान के मसीन लगवा के, स्पीच थेरेपी से राहुल ल पढ़ाय जाही इही बात ल भूपेस बघेल किहिस । छत्तीसगढ़ म ऐेकर पहिली अइसन घटना नइ होय रिहिस। हरियानाभर म एकझन लइका ल बोरवेल के गड्ढा से पचास घंटा म जीयत निकाले गे रिहिस । देस के कई परदेस म अइसन घटना घटथेे, फेर बोरवेल म गिरे लइकामन ल जादातर नइ बचाय जा सकय। 105 घंटा के सरलग कोसिस करके सरकार ह बड़े काम करके देखा दिस।
ऐमा राहुल जइसे लइका के जीवटपना, हिम्मत ल घलो सब संहारवत हें। पानी म गोड़मन बुड़े रिहिस । चमड़ा अउ लहू म इन्फेक्सन हो जेथे अइसन म। बाहिर दुनिया म खुल्ला हवा म सांस लेवइयामन गड्ढा म गिरे राहुल के दसा ल सोच के दहसत अउ संसों म परे रिहिन। जनइयामन जानथे कि गड्ढा म परे राहुल के दुख म भूपेस ल नींद नइ अइस होही । भूपेस बघेल अपन काम अउ नवा-नवा जमीनी योजना के सेती चरचा म रहिथे। अभी परयावरन उपर महासम्मेलन बिदेस म हे । गोबर के महत्तम, वोकर खरीदी ऊपर बोले बर भूपेस बघेल ल बलाय गे हे।
माटी म सोना ऊपजाबो।
चल संगी जुर-मिल कमाबो।
लछिमन ह लिखे हे। माटी म सोना पैदा करे के मंतर सबे नइ साध पावंय। भूपेस ह गवइंहा मनखे ए। किसान के बेटा ए। वोला ए मंतर सिद्ध हे। मंझनिया दू बजे राहुल बोरवेल म गिरिस तब ले महतारी कलपत रिहिस। पंथी गीत के बात सुरता आथे।
मोरा हीरा गंवागे बन कचरन म।
मूड़ पटक-पटक रो ले पथरन म।
मूड़ पटक-पटक के रोवत महतारी ल भूपेस ह हांसे के अवसर लान दिस। हमर सबके माथा ऊंच कर दिस। तभे वोकर बर असीस निकलिस ‘तहीं हमर भगवान अस।’ दूसर बड़े काम सरकारी इस्कूल ल चाक-चौबद करे के जउन काम होय हे वोहा अवइया समे म अपन गुन बताही। राजनांदगांव से लेके आदिवासी छेत्र के जिलामन म नवा -नवा चकाचक चमकत स्कूल खुले हे। बहुत पइसा भर के निजी स्कूल म पढ़इया लइकामन ल जउन सुविधा मिलथे वो सुविधा सरकारी स्कूल म दे जात हे। 260 स्कूल आदिवासी छेत्र म खुल गे जउन ह बंद रिहिन । लोक गीत हे
मोर बर स्कूल खोलवा दे महराज।
मोरो मन पढ़े-लिखे के होथे।
अंधियार ले मोला निकाल दे महराज
मोरो मन आगू बढ़े के होथे।
मोला रद्दा देखा दे महराज
मोरो मन ह अगास छुवे के होथे।
इही पढ़ंता लइकामन हमर पुरखा डॉ. खूबचंद बघेल, सुन्दरलाल सरमा, मिनी माता, बैरिस्टर छेदीलाल ठाकुर, प्यारे लाल सिंह, पवन दीवान के सपना ल पूरा करहीं। छत्तीसगढ़ अउ देस के भाग जगाहीं।
Published on:
20 Jun 2022 04:38 pm
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