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जियो रेफरेंस मैप से ऑनलाइन होगी प्रदेश के वनों की निगरानी

वन्यजीवों के प्राकृतिक रहवास को संरक्षित करने बनाई योजना,वनों की कटाई, उत्खनन व अतिक्रमण का हो रहा डिजिटल डाटा तैयार

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Surya Pratap Goutam

Feb 02, 2016

forest sarching

new sistam dublpment

रायपुर.प्रदेश के जंगलों को बचाने के लिए हाईटेक तकनीक का जल्द ही सहारा लिया जाएगा। जंगलों की कटाई, उत्खनन, उसकी जमीन की नाप-जोख और निगरानी के लिए सैटेलाइट की मदद से डिजिटल जियो मैप बनाया जा रहा है। इस मैप की सहायता से जंगल की जमीन पर होने वाली हर हरकत के हालातों को बारीकी से समझा जा सकेगा। इससे वनों में की जाने वाली पेड़ों की अवैध कटाई, उत्खनन और अतिक्रमण के अलावा अन्य निजी इस्तेमाल और उसके दुरुपयोग को रोका जा सकेगा। यानी जियो मैपिंग जंगलों को उसके वास्तविक रूप में रखने के लिए असरकारी मानी जा रही है।

सम्पूर्ण जानकारी होगी डिजिटल
प्रदेश में वनों की सुरक्षा के लिए डिजिटल जियो रेफरेंस मैप बनाए जा रहें हैं। सेटेलाइट की सहायता से बने इस नक्शे के माध्यम से केंद्र्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ऑनलाइन देश के सभी राज्यों के वनों की स्थिति पर निगरानी रखेगा। राज्य सरकार 2011 से इस डिजिटल नक्शे को तैयार कर रही है। केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने सभी राज्यों के प्रधान मुख्य वन संरक्षकों और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डनों की बैठक आयोजित कर वनों और वन्यप्राणियों के संरक्षण पर चर्चा करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश दिए कि प्रदेश के हर जिले की वन भूमि और राजस्व भूमि जहां वन है उनका भी चिन्हांकन किया जाए, ताकि वनों की अवैध कटाई, संचालित खदानों का क्षेत्रफल, उत्खनन की वर्तमान स्थिति स्पष्ट दिखाई पड़े। वन्य जीवों के प्राकृतिक रहवास की जानकारी इस डिजिटल डाटा में दर्शाई जाएगी।

जल्द से जल्द नक्शे का काम पूर्ण करे
वन्यजीव विशेषज्ञ अजय दुबे के अनुसार प्रदेश सरकार के द्वारा पिछले साल 31 अक्टूबर 2015 तक केंद्र को यह नक्शा भेजा जाना था। अब राज्य सरकार की नैतिक जिम्मेदारी बन गई है कि जल्द से जल्द नक्शे का काम पूर्ण करे। दिन ब दिन घटते वनों के क्षेत्रफल के कारण वन्यजीव आबादी की ओर रूख कर रहे हैं जिससे मानव संघर्ष की स्थिति निर्मित हो रही है। वन्य जीवों के रहवास को सुरक्षित रखने के लिए यह अहम योजना है। नक्शे में यह भी समाहित होगा की वन और राजस्व के अंतर्गत आने वाले वन का कितना क्षेत्रफल है। इन भूमि में अतिक्रमण कारकों के द्वारा कितनी भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि गर्मी के मौसम वन्य प्राणियों के लिए कितने जल स्रोत तैयार किए गए हैं और उनकी वास्तविक स्थिति क्या है। जंगल में लगने वाली आग और उससे क्षति का आकलन भी मैप से किया जाएगा। वन्यप्राणियों की रक्षा के लिए विभाग के इंतजामों का जायजा भी इसी नक्शे से लिया जाएगा।

जल्द होगा तैयार
डिजिटल मैप वन विभाग के द्वारा तैयार किया जा रहा है। संबधित अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा कार्य किया जा रहा है। जल्द ही यह नक्शा बनकर तैयार हो जाएगा।
बीएन द्वेदी, पीसीसीएफ (वन्य प्राणी)

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