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Raipur: सीजेआई सूर्यकांत ने कहा प्रत्येक व्यक्ति को जनजातीय इतिहास को जानना चाहिए

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने नवा रायपुर में बने देश के पहले डिजिटल म्यूजियम शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय का किया अवलोकन

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Raipur

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने 22 फरवरी को छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर (Raipur) के आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में बने देश के पहले डिजिटल संग्रहालय (Digital Museum) का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का यह जनजातीय संग्रहालय अद्वितीय है। देश के प्रत्येक नागरिक को जनजातीय इतिहास और संस्कृति से वाकिफ होना चाहिए।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI Suryakant) ने छत्तीसगढ़ के जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आंदोलनों और शौर्य गाथाओं पर संग्रहालय में बने प्रत्येक गैलरी को निकट से देखा। उन्होंने कहा कि इस संग्रहालय में जनजातीय आंदोलनों की स्मृतियां लोगों को शोषण एवं अन्याय के खिलाफ एक जुट होने और उसका प्रतिकार करने के लिए प्रेरित करेंगी।

आदिमजाति विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा ने जनजातीय संग्रहालय पहुंचे सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस प्रशांत कुमार और हाईकोर्ट (High Court) बिलासपुर के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, राजस्थान (Rajasthan) के चीफ जस्टिस कल्पथी राजेंद्रन श्रीराम सहित अन्य न्यायाधीशों का बीरनमाला से आत्मीय स्वागत करने के साथ ही उन्हें स्मृति स्वरूप जनजातीय जीवन पर आधारित भित्ती चित्र भेंट किया।

प्रमुख सचिव बोरा ने जनजातीय संग्रहालय (Tribal Museum) के अवलोकन के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत सहित अन्य न्यायाधीशों को जनजातीय विद्रोहों की पृष्ठिभूमि और जनजातीय नायकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। संग्रहालय की अलग-अलग गैलरियों में प्रदर्शित विद्रोहों को साल, साजा और महुआ के प्रतिकात्मक वृक्ष के पत्तों के जरिये समझाने का प्रयास किया गया है। संग्रहालय में बने यह वृक्ष उसी तरह से है जिस तरह से मोशन फिल्मों में एक वृद्ध व्यक्ति फिल्म की कहानी बताते है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने जनजातीय संग्रहालय में प्रदर्शित भूमकाल विद्रोह के बारे में जानकर काफी प्रभावित हुए। यह विद्रोह बस्तर (Bastar) क्षेत्र के चित्रकोट के आसपास वर्ष 1910 में हुआ था। यह विद्रोह 20 वर्षीय जननायक गुंडाधुर के नेतृत्व में, औपनिवेशिक वन नीतियों, जमींदारों के शोषण और बाहरी हस्तक्षेप के विरूद्ध था, जिसमें आदिवासियों ने पारंपरिक हथियारों से अंग्रेजों के खिलाफ किया था। चीफ जस्टिस ने संग्रहालय में शहीद वीर नारायण सिंह की तलवार सहित अन्य जनजातीय नायकों द्वारा विद्रोह के दौरान उपयोग में लाए गए अस्त्र-शस्त्र का भी अवलोकन किया।

चीफ जस्टिस ने गैलरी में स्थापित मां दंतेश्वरी का प्रतिकात्मक डिजिटल मंदिर (Digital Temple) से काफी प्रभावित हुए उन्होंने दो बार घंटी बजाकर मां दंतेश्वरी के दर्शन किया। उन्होंने आगामी समय बस्तर (दंतेवाड़ा) जाकर मां दंतेश्वरी की साक्षात दर्शन करने की इच्छा जाहिर की।

उल्लेखीनय है कि छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) राज्योत्सव रजत जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा 1 नवबंर 2025 को इस भव्य डिजिटल संग्रहालय को लोगों को समर्पित किया था। तब से आगुन्तकों के लिए यह संग्रहालय आकर्षण एवं उत्साह का केंद्र बना हुआ है। जनसमुदाय में इस संग्रहालय के प्रति आकर्षण और लोकप्रियता को देखते हुए इसके द्वितीय चरण के विस्तार की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

गौरतलब है कि आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणी के मार्गदर्शन में जनजातीय संस्कृति एवं परंपराओं पर आधारित म्यूजियम तथा सहित वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी म्यूजियम का निर्माण तेजी के साथ पूरा हुआ है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (CM Vishnu Deo Sai) के निर्देश पर निर्माण से उद्घाटन तक विभाग के अधिकारी-कर्मचारी बोरा के नेतृत्व में बारीकी से एक-एक पहलुओं को परखा तब जाकर संग्रहालय का बुनियाद बनकर तैयार हुआ है। संग्रहालय का धरातल में आने से नई पीढ़ियों को अपने पुरखों की वीरता और साहस का याद दिलाता रहेगा। यह न केवल जनजातीय वर्गो के बल्कि सभी लोगों के प्रेरणापद है।