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प्रदेश में पहली बार… कार्बन क्रेडिट से निगम को होगी करोड़ों की कमाई, प्लान तैयार

शर्त रखी गई कि कोई भी देश उतने ही टन ग्रीन हाउस (Raipur Nagar Nigam) गैस का उत्सर्जन कर सकता है, जितना उसके पास कार्बन क्रेडिट होगा

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रायपुर में हरियाली ज्यादा है

कार्बन क्रेडिट बेचकर पैसे कमाने की राह पर है। इसके लिए पहले यह निर्धारण किया जाएगा कि रायपुर के पास कार्बन क्रेडिट कितना है? इसका पता लगाने के लिए नगर निगम इसी हफ्ते टेंडर जारी करने वाला है। इसी के साथ रायपुर राज्य का पहला और संभवत: देश का चौथा ऐसा शहर बन जाएगा जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे इस व्यापार में कदम रखेगा।

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गौरतलब है कि इंदौर देश का पहला शहर था जिसने 2 साल पहले 80 लाख रुपए की कमाई के साथ कार्बन क्रेडिट का लेन-देन शुरू किया था। इस साल इंदौर ने इसके जरिए 8 करोड़ रुपए की कमाई की है। इसी से प्रेरित होकर रायपुर नगर निगम भी पिछले 6 महीनों से कार्बन क्रेडिट हासिल करने पर काम कर रहा है। रायपुर के पास कितना कार्बन क्रेडिट है, इसका निर्धारण करने के लिए नगर निगम इसी हफ्ते टेंडर जारी करेगा। दरअसल, कार्बन क्रेडिट की जानकारी इकट्ठा करना जटिल प्रक्रिया है। इसका पता लगाने के लिए जानकारों की पूरी टीम लगानी पड़ती है।

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इसका व्यापार क्यों? समझिए

क्योटा और पैरिस समझौते में साइन करने वाले देशों में कार्बन उत्सर्जन रोकने के लिए सख्त कानून हैं। इन देशों में काम कर रही कंपनियों को तय सीमा से अधिक कार्बन या ग्रीन हाउस गैसेज़ का उत्सर्जन करने पर ज्यादा टैक्स देना पड़ता है। इसके विकल्प के रूप में विदेशी कंपनियां कार्बन क्रेडिट खरीदती हैं। इसके अलावा देश में भी ऐसे कई उद्योग हैं जो तय सीमा से अधिक कार्बन का उत्सर्जन कर रहे हैं। ऐसी कंपनियों को कार्बन क्रेडिट की जरूरत पड़ती है।

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इन पांच कामों के लिए रायपुर को मिलेगा कार्बन क्रेडिट

कार्बन क्रेडिट ऐसे प्रोजेक्ट को मिलता है, जिससे कार्बन का उत्सर्जन रोका गया हो। रायपुर में सरकारी बिल्डिंगों में सोलर पैनल, नदी-तालाबों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, बेहतर वेस्ट मैनेजमेंट, इलेक्ट्रिक वीकल्स को बढ़ावा और हरियाली, ये सभी ज्यादा से ज्यादा कार्बन क्रेडिट हासिल करने की दिशा में कारगर साबित होंगे।

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1997 में यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज ने क्योटो प्रोटोकॉल बनाया। इस पर साइन करने वाले देशों के बीच करार हुआ कि वे ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन पर बनाए नियम मानेंगे। इसके बाद 2015 में पेरिस समझौता में भी क्लाइमेट चेंज पर नियम कायदे बने। जिस पर दुनिया के 195 देश सहमत हुए। इसके तहत कोई देश या इंडस्ट्री तय लिमिट से ज्यादा कार्बन डाई ऑक्साइड या ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन नहीं कर सकते। ये लिमिट तय हुई कार्बन क्रेडिट से (एक कार्बन क्रेडिट बराबर एक टन कार्बन डाई-ऑक्साइड या ग्रीन हाउस गैसेज़)। शर्त रखी गई कि कोई भी देश उतने ही टन ग्रीन हाउस गैस का उत्सर्जन कर सकता है, जितना उसके पास कार्बन क्रेडिट होगा। यदि सभी देश उतनी ही ग्रीन हाउस गैसेज़ उत्सर्जित करते जितनी उनके पास कार्बन क्रेडिट है तो, न तो प्रदूषण बढ़ता और न ही इंडस्ट्रीज़ के सामने अतिरिक्त कार्बन क्रेडिट कमाने की नौबत आती।

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रायपुर नगर निगम आयुक्त मयंक चतुर्वेदी ने बताया कि रायपुर के पास कितना कार्बन क्रेडिट है, इसका आकलन करने के लिए इसी हफ्ते टेंडर जारी किया जाएगा। टेंडर पास होने के 21 दिन के भीतर फर्म का चयन कर लिया जाएगा। कार्बन क्रेडिट बेचने से निगम को अगले 8-10 साल तक राजस्व की प्राप्ति होगी।