किसी निर्जन, एकांत या जंगल आदि में मल-मूत्र त्याग करने से पूर्व उस स्थान को भली-भांति देख लेना चाहिए कि वहां कोई ऐसा वृक्ष तो नहीं है जिसपर प्रेत आदि निवास करते हैं अथवा उस स्थान पर कोई मजार या कब्रिस्तान तो नहीं है। किसी नदी, तालाब, कुआं या जलीय स्थान में थूकना या मल-मूत्र का त्याग करना किसी अपराध से कम नहीं है, क्योंकि जल ही जीवन है। जल को दूषित करने से जल के देवता वरुण रुष्ट हो सकते हैं।