
Raipur का इतिहास: रायपुर. छत्तीसगढ़ प्रदेश की राजधानी रायपुर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है. आज रायपुर दुनिया में आकर्षण का केन्द्र बन चुका है. रायपुर का इतिहास भी रतनपुर के कलचुरी वंश के विभाजन से जुड़ा हुआ है. आपको बता दें कि रायपुर नगर की स्थापना 14वीं शत्ती ईस्वी में की गई थी, ऐसा इसीलिये क्योंकि रतनपुर के कलचुरी वंश को अपने सम्राज्य का विभाजन करने की आवश्यक्ता पड़ी थी और कलचुरियों के राज्य विभाजन के परिणाम स्वरूप रायपुर की स्थापना हुई . इनके अनुसार ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से रायपुर दक्षिणी कोशल का हिस्सा था और इसे मौर्य साम्राज्य के तहत माना जाता था.
पूर्व में किस नाम से जाना जाता था छत्तीसगढ़ की राजधानी को
रायपुर की स्थापना के पीछे कलचुरी राजवंश के राजा रामचंन्द्र व उनके पुत्र ब्रम्हदेव राय का योगदान है. राय से रायपुर होने की मान्यता है. ब्रम्हदेव राय के नाम से जुड़ता हुआ रायपुर नामकरण हुआ ऐसा माना जाता है. रायपुर के सतयुग में कनकपुर, त्रेतायुग में हाटकपुर, द्वापर युग में कंचनपुर और कलयुग में इसका नाम रायपुर पड़ा. यद्यपि इस किंवदंती का कोई साक्ष्य या प्रमाण उपलब्ध नहीं है .
ऐतिहासिकता
मराठों ने रायपुर में अपना आधिपत्य किया था उसके पूर्व तक को राजधानी माना जाता था, परंतु 758 ईस्वी में जब मराठा शासक बिम्बाजी नागपुर से छत्तीसगढ़ के रतनपुर आए और रतनपुर पुनः सत्ता का केन्द्र बन गया.
छत्तीसगढ़ में ब्रिटिश शासन में रायपुर बना राजधानी
अंग्रेजों ने अपनी फूट डालो और राज करो की नीति के तहत जो षडयंत्र फैला रखा था उसी के तहत सन् 1817 में मराठा-अंग्रेज तृतीय युद्ध में मराठा पराजित हो गए. इसके पश्चात और 1818 में छत्तीसगढ़ में प्रथम नियुक्ति कर्नल एग्न्यु ने रतनपुर से रायपुर को राजधानी बनाने का निर्णय लिया. अंग्रेजो का शासन स्वतंत्रता पूर्व तक निर्बाध चलता रहा स्वतंत्रता के बाद 1 नंवबर 2000 को छत्तीसगढ़ एक नये राज्य के रूप में मान्यता मिली और पुनः रायपुर को छत्तीसगढ़ की राजधानी बनने का गौरव प्राप्त हुआ.
Published on:
06 Jun 2022 11:43 am
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