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#Force से लूटे हथियारों से Naxali बना रहे अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर

नक्सल प्रभावित इलाकों में फोर्स से लूटे गए हथियारों से अत्याधुनिक हथियार बनाने के लिए अब कारखाने खुलने लगे हैं। नक्सली यूबीजीएल से घातक हथियार बनाने की तैयारी में जुट गए हैं।

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Surya Pratap Goutam

Mar 07, 2016

Maoists looted weapons remain under barrel grenade

Maoists looted weapons remain under barrel grenade launcher

रायपुर.
नक्सल प्रभावित इलाकों के घने जंगलों में फोर्स से लूटे गए हथियारों से अत्याधुनिक हथियार बनाने के लिए अब कारखाने खुलने लगे हैं। खासकर नक्सली फोर्स से ही लूटे गए यूबीजीएल से घातक हथियार बनाने की तैयारी में जुट गए हैं।


अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर तैयार कर लगातार फोर्स के लिए परेशानी बढ़ा रहे। यही कारण है कि बीते छह माह में यूबीजीएल से धमाका कर उन्होंने फोर्स की नींद उड़ा दी है। पुलिस का दावा है जिस यूबीजीएल तकनीक का इस्तेमाल माओवादी कर रहे वह फोर्स से ही लुटे गए हैं। हथियारों की तकनीक के बारे में जानकारी लेने के लिए खुफिया विभाग को सक्रिय कर दिया गया है।


3 मार्च को सुकमा डब्बामरका में सीआरपीएफ-कोबरा के 200 जवानों पर हमला हुआ था। नक्सलियों ने फोर्स का मूवमेंट होते ही एकाएक फायर किए। माओवादियों ने फोर्स को मात देने के लिए यूबीजीएल दागे। एंबुश में यूबीजीएल से एकाएक फायरिंग होने पर जवानों को संभलने में जरा सा वक्त लगा।


हालांकि, मुठभेड़ में लड़ते हुए 2 जवान शहीद हो गए। जबकि, 7 लोग यूबीजीएल के धमाके की चपेट में आकर जख्मी हो गए। उन्हें तत्काल रायपुर लाया गया। माओवादियों ने छह माह के भीतर दूसरी मर्तबा यूबीजीएल तकनीक का इस्तेमाल किया।


फोर्स के आला अफसरों का दावा है कि माओवादियों के पास मौजूद यूबीजीएल फोर्स से ही लूटे गए हथियार हैं। यह हथियार फोर्स के लिए काफी घातक सिद्ध हो रहा। माओवादी बेल्ट के घने जंगलों में यूबीजीएल बनाने के कारखाने तक बनाए गए हैं।


एके-47 और एसएलआर में यूबीजीएल


अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर (यूबीजीएल) की तकनीक माओवादी एके 47 और एसएलआर में इस्तेमाल कर रहे। अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर की मारक क्षमता 200 मीटर तक की रहती है। दूर से धमाका करना आसान है। जिस जगह विस्फोट होगा वहां 20 से 25 मीटर तक बच पाना मुश्किल है।


UBGL तकनीक अपनाई थी फोर्स ने


एक सूत्र के मुताबिक आंध्र और महाराष्ट्र के बॉर्डर वाले हिस्से में माओवादी धमाकेदार यूबीजीएल तकनीक की अदला-बदली कर रहे हैं। जिसकी वजह से दूसरे राज्यों की फोर्स को भी बड़े हमले का सामना करना पड़ रहा। बताया जाता है 3 साल पहले माओवाद प्रभावित राज्यों में फोर्स ने सुरक्षा मजबूत करने के लिए यूबीजीएल तकनीक अपनाई थी।

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